गर कोई मुझ सेे आ कर कहता, यार उदासी हैमैं उस को गले लगाकर कहता, यार उदासी हैहोता दरवेश अगर मैं तो फिर सारी दो-पहरीगलियों में सदा लगाकर कहता, यार उदासी है— Siddharth Saaz