
दुख तो बहुत मिले हैं मोहब्बत नहीं मिली
या'नी कि जिस्म मिल गया औरत नहीं मिली
मुझ को पिता की आँख के आँसू तो मिल गए
मुझ को पिता से ज़ब्त की आदत नहीं मिली
— Abhishar Geeta Shukla
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