@SandeepThakur
Sandeep Thakur shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Sandeep Thakur's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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मुझ से दो दिन अलग रही है तू
देख तो कैसी लग रही है तू
हो गया राख जल के मैं लेकिन
धीरे-धीरे सुलग रही है तू
गुल सा तू तेरा साथ ख़ुशबू सा
हाथ में तेरा हाथ ख़ुशबू सा
हो के तुझ से जुदा भटकता हूँ
गुल से बिछड़ी अनाथ ख़ुशबू सा
इस नदी की जवानी गिरवी है
क्या बहेगी रवानी गिरवी है
डूबी है बूँद-बूँद कर्ज़े में
बाँध में सारा पानी गिरवी है
आ के नज़दीक मुँह न फेर ग़ज़ल
पास आ बैठ थोड़ी देर ग़ज़ल
सब तेरे नूर से चमकते हैं
लफ़्ज़ मिसरे ख़याल शेर ग़ज़ल
अनोखा शख़्स था उस से मिलाया हाथ जब मैंने
लगा जैसे कि उस की उँगलियों में दिल धड़कता था
पहले ख़ुद को एक अच्छी जाॅब के क़ाबिल करूँ
घर ख़रीदूँ कार लूँ फिर पेश तुझको दिल करूँ
तू कोई एग्ज़ाम है क्या पास करना है तुझे
तू कोई डिग्री है क्या पढ़कर तुझे हासिल करूँ
ज़िंदगी इक फ़िल्म है मिलना बिछड़ना सीन हैं
आँख के आँसू तिरे किरदार की तौहीन हैं
पाँव में खनकी चाँदी हो जैसे
उसने मुंडेर फाँदी हो जैसे
छत पे दो पल मिलन जुदाई में
धूप में बूँदा-बाँदी हो जैसे
हर शेर हर ग़ज़ल पे है ऐसी छाप तेरी
तस्वीर बन रही है इक अपने आप तेरी
तेरे लिए किसी को इतना दीवाना देखा
लगने लगी है मुझ को चाहत भी पाप तेरी
बेवजह मुझसे फिर ख़फ़ा क्यों है
ये कहानी ही हर दफ़ा क्यों है
कुछ भी मजबूरी तो नहीं दिखती
मैं क्या जानूं वो बेवफ़ा क्यों है
ख़्बाब आंखों में बंद कर लेते
बात गर दिल की चंद कर लेते
आप भी हो ही जाते दीवाने
गर किसी को पसंद कर लेते
तू मिला ही नहीं मगर फिर भी
है बिछड़ने का मुझको डर फिर भी
जानता हूं तू आ नहीं सकता
पर सजाया है मैंने घर फिर भी
दिल के दरवाजे भेड़ कर देखो
जख़्म सारे उधेड़ कर देखो
बंद कमरे में आईने से कभी
तुम मेरा जिक्र छेड़ कर देखो
आज पलटे जो ख़्बाब के पन्ने
मैंने दिल की किताब के पन्ने
वक़्त ने देख मोड़ रक्खे हैं
तेरे हुस्नो शबाब के पन्ने
जब मुंडेरों से धूप ढलती है
तो कमी उसकी मुझको खलती है
जो हथेली पे अपनी लिखती थी
दोस्ती प्यार में बदलती है
तेरे जाने के बाद बस यादें
हर तरफ याद-याद बस यादें
सोना, चांदी, जमीन, घर सब कुछ
हैं मेरी जायदाद बस यादें
इश्क़ से अपने कुछ चुने लम्हें
अनकहे और अनसुने लम्हें
आओ मिलकर जियें दुबारा से
सर्द रातों के गुनगुने लम्हें
फैले हैं क़तरे ओस के घर में
रोया हूं मन मसोस के घर में
मैंने पलकें बिछाई थीं लेकिन
चांद उतरा पड़ोस के घर में