बेवजह मुझ सेे फिर ख़फ़ा क्यूँ है ये कहानी ही हर दफ़ा क्यूँ हैकुछ भी मजबूरी तो नहीं दिखतीमैं क्या जानूं वो बे-वफ़ा क्यूँ है— Sandeep Thakur