ज़िंदगी इक फ़िल्म है मिलना बिछड़ना सीन हैं
आँख के आँसू तिरे किरदार की तौहीन हैं
आँख के आँसू तिरे किरदार की तौहीन हैं
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ज़िंदगी इक फ़िल्म है मिलना बिछड़ना सीन हैं
आँख के आँसू तिरे किरदार की तौहीन हैं
आँख के आँसू तिरे किरदार की तौहीन हैं
एक ही मौसम वही मंज़र खटकने लगता है
सच ये है हम आदतन बदलाव के शौक़ीन हैं
नींद में पलकों से मेरी रंग छलके रात भर
आँख में हैं तितलियाँ तो ख़्वाब भी रंगीन हैं
राह तकती रात का ये रंग है तेरे बिना
चाँद भी मायूस है तारे भी सब ग़मगीन हैं
उँगलियों पे गिन मिरी तन्हाइयों के हम सफ़र
इक उदासी जाम दूजा याद तेरी तीन हैं
क़ाएदे से कब जिया है ज़िंदगी मैं ने तुझे
मैं तिरा मुजरिम हूँ मेरे जुर्म तो संगीन हैं
ख़ुशनुमा माहौल था कल तक थिरकते थे सभी
आज आख़िर क्या हुआ है लोग क्यूँ ग़मगीन हैं
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'उदासी'
इबारत जो उदासी ने लिखी है
बदन उस का ग़ज़ल सा रेशमी है
किसी की पास आती आहटों से
उदासी और गहरी हो चली है
उछल पड़ती हैं लहरें चाँद तक जब
समुंदर की उदासी टूटती है
उदासी के परिंदों तुम कहाँ हो
मिरी तन्हाई तुम को ढूँढती है
मिरे घर की घनी तारीकियों में
उदासी बल्ब सी जलती रही है
उदासी ओढ़े वो बूढ़ी हवेली
न जाने किस का रस्ता देखती है
उदासी सुब्ह का मासूम झरना
उदासी शाम की बहती नदी है
Read Fullबदन उस का ग़ज़ल सा रेशमी है
किसी की पास आती आहटों से
उदासी और गहरी हो चली है
उछल पड़ती हैं लहरें चाँद तक जब
समुंदर की उदासी टूटती है
उदासी के परिंदों तुम कहाँ हो
मिरी तन्हाई तुम को ढूँढती है
मिरे घर की घनी तारीकियों में
उदासी बल्ब सी जलती रही है
उदासी ओढ़े वो बूढ़ी हवेली
न जाने किस का रस्ता देखती है
उदासी सुब्ह का मासूम झरना
उदासी शाम की बहती नदी है
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ख़्बाब आँखों में बंद कर लेते
बात गर दिल की चंद कर लेते
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दिल के दरवाज़े भेड़ कर देखो
जख़्म सारे उधेड़ कर देखो
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आज पलटे जो ख़्बाब के पन्ने
मैं ने दिल की किताब के पन्ने
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