जाम सिगरेट कश और बस
कुछ धुआँ आख़िरश और बस
मौत तक ज़िंदगी का सफ़र
रात-दिन कश्मकश और बस
पी गया पेड़ आँधी मगर
गिर पड़ा खा के ग़श और बस
ज़िंदगी जलती सिगरेट है
सिर्फ़ दो-चार कश और बस
सूखते पेड़ की लकड़ियाँ
आख़िरी पेशकश और बस
— Sandeep Thakur
कुछ धुआँ आख़िरश और बस
मौत तक ज़िंदगी का सफ़र
रात-दिन कश्मकश और बस
पी गया पेड़ आँधी मगर
गिर पड़ा खा के ग़श और बस
ज़िंदगी जलती सिगरेट है
सिर्फ़ दो-चार कश और बस
सूखते पेड़ की लकड़ियाँ
आख़िरी पेशकश और बस
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