Rachit Sonkar

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@rachitsonkar

Rachit Sonkar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Rachit Sonkar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

मेरे इस सख़्त रवय्ये से सभी डरते हैं मैं मुहब्बत को मुहब्बत की तरह लेता हूँ — Rachit Sonkar
हिज्र की शाम हो शराब न हो वक़्त इतना कभी ख़राब न हो — Rachit Sonkar
मेरे दोनो होंठ ज़ख़्मी हो गए लब तुम्हारे लब नहीं तलवार हैं — Rachit Sonkar
सच हुआ है कहाँ कुछ भी सोचा हुआ हम यही सोच कर सोचते कुछ नहीं — Rachit Sonkar
हमारे बदन से जो आती थी कल तक तुम्हारे बदन की वो ख़ुशबू कहाँ है — Rachit Sonkar
ज़िंदगी के मज़े हम से पूछे कोई ज़िंदगी ले रही है हमीं से मज़े — Rachit Sonkar
हिज्र ग़म और उदासी भी क्या चीज़ है इंतिज़ामात हैं ख़ुद-कुशी के सभी — Rachit Sonkar
एक रिश्ते को किस की नज़र लग गई हिज्र को फिर हमारी ख़बर लग गई — Rachit Sonkar
आप आ ही गए है तो मिल लीजिए वरना यूँँ तो किसी से मैं मिलता नहीं — Rachit Sonkar
वो समझती है उस का हुनर है फ़क़त इश्क़ में बे-वफ़ा हम भी हो सकते हैं — Rachit Sonkar
तुम मुझे याद अब नहीं आते अब मुझे याद हो गए हो तुम — Rachit Sonkar
फँस गई हैं गेसुओं में आप के आप मेरी उँगलियाँ सुलझाइए — Rachit Sonkar
मुझ पर बिछा रही है अपने बदन की चादर मेरे बदन को उस ने बिस्तर बना दिया है — Rachit Sonkar
पहले तो शाम को ही आती थी ये मगर अब आ जाती है उदासी अपने समय से पहले — Rachit Sonkar
ज़रा सा ख़यालों में क्या खो गए हम ख़यालों ने हम को हक़ीक़त दिखा दी — Rachit Sonkar
हाल तेरा पूछने वाले थे हम तू ने बीमारी का नाटक क्यूँ किया — Rachit Sonkar
धोका खा कर भी नहीं समझा कोई हुस्न की जानिब क़दम फिर चल दिए — Rachit Sonkar
ज़िंदगी इक ख़्वाब है जिस को हमें जीना पड़ता है हक़ीक़त की तरह — Rachit Sonkar
सोचता हूँ ख़ुदा से दुआ माँग लूँ और दुआ में ख़ुदा से ख़ुदा माँग लूँ — Rachit Sonkar
इश्क़ ने बर्बाद कर दी ज़िंदगी अब करेंगे इश्क़ को बर्बाद हम — Rachit Sonkar

Ghazal

आओ तुम्हें दिखाएँ हम हौसले जिगर के उस की गली से निकले उस को इशारा कर के देखी है सबने मेरे चेहरे की मुस्कुराहट देखा नहीं किसी ने दिल में मेरे उतर के कितने दिलों की धड़कन उलझी हुई हैं इन में रक्खा करो तुम अपनी ज़ुल्फ़ों को बाँध कर के कुछ इस तरह से उस को दिल में बिठा लिया है बैठी हो जैसे दुल्हन कमरे में सज सँवर के तौहीन तो न कीजे यूँँ मेरी मय-कशी की मुझ को शराब दीजे पूरा गिलास भर के जी जाऊँगा मैं उस की नज़रों की इक छुअन से मर जाऊँगा मैं उस की आँखों में डूब कर के मुझ को सुनाओ अपने दिल की 'रचित' कहानी मुझ को सुनाओ मत तुम क़िस्से इधर उधर के — Rachit Sonkar
तेरी आँखों के परस्तार नज़र आते हैं हर तरफ़ इश्क़ के बीमार नज़र आते हैं तोड़ जाते हैं वही लोग हमारा दिल क्यूँँ जो ज़माने में वफ़ादार नज़र आते हैं अपनी नेकी का फ़साना मैं सुनाऊँ किस को मुझ को हर सम्त गुनहगार नज़र आते हैं काम आते नहीं कुछ लोग मुसीबत के समय जो है बेकार वो बेकार नज़र आते हैं पहले सहरा के सिवा कुछ न नज़र आता था आप आए हैं तो गुलज़ार नज़र आते हैं दिन तो तन्हा ही गुज़रता है मगर रात में हम उस की बाँहों में गिरफ़्तार नज़र आते हैं ख़्वाहिश-ए-वस्ल भी रखते है जुदाई के बा'द दिल के आगे सभी लाचार नज़र आते हैं उस ने छोड़ा है किसी और की ख़ातिर मुझ को अब तो मरने के ही आसार नज़र आते हैं क़त्ल कर दे न कहीं चाहने वालों का 'रचित' उस के गेसू मुझे तलवार नज़र आते हैं — Rachit Sonkar
बहुत मायूस होने पर ये दिल के टूट जाने पर ज़माना हाल पूछेगा मगर आँसू बहाने पर सभी आशिक़ मुहब्बत के ग़मो को बाट लेते हैं किसी से कुछ नहीं कहते ये अपना दिल जलाने पर ख़बर सुन कर तेरे आने की हम सजते सँवरते हैं वगरना हम को क्या मतलब किसी के आने जाने पर मेरा दिल रक़्स करता है ख़ुशी से झूम उठता है तेरे झुमके, तेरे कंगन, तेरी पायल के गाने पर तुझे पाने की हसरत में सभी कुछ हार बैठे हैं कि हम ने दाँव खेले हैं हज़ारों इक ख़ज़ाने पर मेरी नज़रे मिली तुझ सेे तेरी नज़रे मिली मुझ सेे इधर मैं हूँ निशाने पर उधर तू है निशाने पर — Rachit Sonkar
कट रही है ग़ुर्बत में ज़िंदगी ख़सारा है जीतनी थी जो बाज़ी दिल उसे भी हारा है मुझ को देख कर उस ने जब रचित पुकारा है मुझ को क्या पता था ये मौत का इशारा है दिल लगी पड़ी महँगी मुझ को इस क़दर देखो क़ब्र पर मेरी उस ने पूरा दिन गुज़ारा है धूप में वो निकली है शोलो सा बदन ले कर जल रहा है सूरज भी क्या अजब नज़ारा है दिल के टूटे हिस्से को सीने से हटा कर के आसमाँ से कह डाला टूटा इक सितारा है आज उस को आना था वो मगर नहीं आया इंतिज़ार में उस के पूरा दिन गुज़ारा है अजनबी से जानें क्यूँ अपना दिल लगा बैठे लग रहा था जाने क्यूँ वो रचित हमारा है — Rachit Sonkar