मुफ़लिसी में ऐसी हालत हो गई है
मेरी मर जाने की सूरत हो गई है
सोचता था छूट जाएगी किसी दिन
पर उदासी मेरी आदत हो गई है
दोस्त मिट्टी डाल के जाते हैं ऐसे
ज़ीस्त जैसे क़ब्र की छत हो गई है
पहले जो सीलन मेरी दीवार पर थी
अब मेरे चेहरे की रंगत हो गई है
मैं ने कल देखा था उस को घर के बाहर
और भी वो ख़ूब-सूरत हो गई है
डाँटते हैं उल्टे वो माता पिता को
बच्चों की अब इतनी हिम्मत हो गई है
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