दर्द होगा टस से मस ये भूल जा
दुख रहा है जिस्म बस ये भूल जा
तीन सौ पैंसठ कैलेंडर फाड़ कर
क्या हुआ पिछले बरस ये भूल जा
तू निकल आया क़फ़स से याद रख
है अभी तुझ में क़फ़स ये भूल जा
बाहों में वो है तो उस को प्यार कर
इश्क़ है ये या हवस ये भूल जा
तू सफ़र से लौट कर आएगा जब
सब मिलेगा जस का तस ये भूल जा
— Sandeep Thakur















