Intiqam Shayari - Poetic Verses Reflecting Revenge and Resilience

Explore a striking collection of Intiqam Shayari that captures the emotions of revenge, justice, and inner strength. These poetic lines reflect the intensity of retaliation and the journey of overcoming betrayal and challenges.

Best Intiqam Shayari on Revenge and Justice

badla shayari
इज़हार-ए-इश्क़ उस से न करना था 'शेफ़्ता'
ये क्या किया कि दोस्त को दुश्मन बना दिया
Mustafa Khan Shefta
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ये भी इक तरकीब है दुश्मन से लड़ने की
गले लगा लो जिस पर वार नहीं कर सकते
Shariq Kaifi
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तुमसे जो मिला हूँ तो मेरा हाल है बदला
पतझड़ में भी जैसे के कोई फूल खिला हो
Haider Khan
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इसलिए लड़ता है मुझसे मेरा दुश्मन
उसका भी मेरे सिवा कोई नहीं है
Aves Sayyad
उम्र भर कौन निभाता है तअल्लुक़ इतना
ऐ मेरी जान के दुश्मन तुझे अल्लाह रक्खे
Ahmad Faraz
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Heart Touching Intiqam Shayari in Hindi

pratishodh shayari
दुश्मनी कर मगर उसूल के साथ
मुझ पर इतनी सी मेहरबानी हो

मेरे मे'यार का तक़ाज़ा है
मेरा दुश्मन भी ख़ानदानी हो
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Akhtar Shumar
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कहाँ की दोस्ती किन दोस्तों की बात करते हो
मियाँ दुश्मन नहीं मिलता कोई अब तो ठिकाने का
Waseem Barelvi
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दश्त छोड़े हुए अब तो अरसा हुआ
मैं हूँ मजनूँ मगर नाम बदला हुआ

मुझको औरत के दुख भी पता हैं कि मैं
एक लड़का हूँ बेवा का पाला हुआ
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Rishabh Sharma
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तेरा बनता था कि तू दुश्मन हो
अपने हाथों से खिलाया था तुझे

तेरी गाली से मुझे याद आया
कितने तानों से बचाया था तुझे
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Ali Zaryoun
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उस दुश्मन-ए-वफ़ा को दुआ दे रहा हूँ मैं
मेरा न हो सका वो किसी का तो हो गया
Hafeez Banarsi
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Emotional Intiqam Shayari on Betrayal and Pain

pratikar shayari
अब दोस्त कोई लाओ मुकाबिल में हमारे
दुश्मन तो कोई क़द के बराबर नहीं निकला
Munawwar Rana
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मुनाफ़िक़ दोस्तों से लाख बेहतर हैं ख़ुदा दुश्मन
कि ग़द्दारी नवाबों से हुकूमत छीन लेती है
Unknown
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ऐसे तेवर दुश्मन ही के होते हैं
पता करो ये लड़की किस की बेटी है
Zia Mazkoor
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कुछ ख़ास तो बदला नहीं जाने से तुम्हारे
बस राब्ता कम हो गया फूलों की दुकाँ से
Ashu Mishra
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उसे शायद नहीं ये इल्म जो आतिश लगाते हैं
हवाओं ने अगर बदला जो रुख़ जल वो भी जाएँगे
A R Sahil "Aleeg"

Beautiful Intiqam Shayari in Urdu

जुदा किसी से किसी का ग़रज़ हबीब न हो
ये दाग़ वो है कि दुश्मन को भी नसीब न हो
Nazeer Akbarabadi
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मुझे दुश्मन से भी ख़ुद्दारी की उम्मीद रहती है
किसी का भी हो सर क़दमों में सर अच्छा नहीं लगता
Javed Akhtar
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नाज़ क्या इस पे जो बदला है ज़माने ने तुम्हें
मर्द हैं वो जो ज़माने को बदल देते हैं
Akbar Allahabadi
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ज़रा मौसम तो बदला है मगर पेड़ों की शाख़ों पर नए पत्तों के आने में अभी कुछ दिन लगेंगे
बहुत से ज़र्द चेहरों पर ग़ुबार-ए-ग़म है कम बे-शक पर उन को मुस्कुराने में अभी कुछ दिन लगेंगे
Javed Akhtar
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बात आती है दोस्तों की जब
मुझ को दुश्मन अज़ीज़ लगते हैं
Meem Maroof Ashraf

Short Intiqam Shayari for Instagram Captions

याद आई जब मुझे 'फ़रहत' से छोटी थी बहन
मेरे दुश्मन की बहन ने मुझ को राखी बाँध दी
Ehsan Saqib
आप बच्चों का दिल नहीं तोड़ें
भाई ये दुश्मनी हमारी है
Vishnu virat
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तेरी तारीफ़ करने लग गए हैं
तेरे दुश्मन हमारे शे'र सुनके
Tanoj Dadhich
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उस के दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा
वो भी मेरी ही तरह शहर में तन्हा होगा
Nida Fazli
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क्या भला दिन रात रोना, यार बदलो
कुछ नही रक्ख़ा ग़मों में सार, बदलो

साल बदला है, सुनो अब तुम भी अपना
रंग बदलो, चाल बदलो, प्यार बदलो
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Ravi 'VEER'

Poetic Intiqam Shayari on Resilience and Strength

शिकस्ता नाव समझ कर डुबोने वाले लोग
न पा सके मुझे साहिल पे खोने वाले लोग

ज़रा सा वक़्त जो बदला तो हम पे हँसने लगे
हमारे काँधे पे सर रख के रोने वाले लोग
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Kashif Sayyed
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दुश्मनी का सफ़र इक क़दम दो क़दम
तुम भी थक जाओगे हम भी थक जाएँगे
Bashir Badr
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं
मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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रंग बदला यार ने वो प्यार की बातें गईं
वो मुलाक़ातें गईं वो चाँदनी रातें गईं
Hafeez Jalandhari
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दुश्मनों से मिल के उसने इक नया लश्कर बनाया
हार जब दुश्मन गया तो सुल्ह का अवसर बनाया
Sourabh Ratnawat
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Intiqam Shayari on Love and Retaliation

कच्चा सा घर और उस पर जोरों की बरसात है
ये तो कोई खानदानी दुश्मनी की बात है
Saahir
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जो दोस्त हैं वो माँगते हैं सुलह की दुआ
दुश्मन ये चाहते हैं कि आपस में जंग हो
Lala Madhav Ram Jauhar
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दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों
Bashir Badr
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ये रंग-ओ-नस्ल और तशद्दुद के सिलसिले
दुश्मन की राहतों के सिवा और कुछ नहीं
Fatima wasiya jaayasi
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मेरे दुश्मन मुझ को और सता तू
मेरे ज़ख़्म तो ऐसे ही भरते हैं
Meem Alif Shaz

Thoughtful Intiqam Shayari on Inner Power

इन दिनों दोस्त मेरे सारे ही रूठे हुए हैं
मेरे दुश्मन यही मौक़ा है हरा दे मुझ को
Afzal Ali Afzal
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उस ने इस तरह से बदला है रवय्या अपना
पूछना पड़ता है हर वक़्त, तुम्हीं हो ना दोस्त?
Inaam Azmi
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मौत ही इंसान की दुश्मन नहीं
ज़िंदगी भी जान ले कर जाएगी
Arsh Malsiyani
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मैं चाहता यही था सब चाह ख़त्म हो अब
फिर चाहकर तुम्हें बदला ये ख़याल मेरा
Abhay Aadiv
इक दुश्मन को साथ रखा है तूने
दुखती रग पर हाथ रखा है तूने
Rohit Gustakh
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Intiqam Shayari on Overcoming Adversities

ज़रा सा वक़्त जो बदला तो हम पे हँसने लगे
हमारे काँधे पे सर रख के रोने वाले लोग
Kashif Sayyed
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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इस आसमां को मुझसे है क्या दुश्मनी "अली"?
भेजूं अगर दुआ भी तो सर पर लगे मुझे
Ali Rumi
चार दिन झूठी बाहों के आराम से
मेरी बिखरी हुई ज़िंदगी ठीक है

दोस्ती चाहे जितनी बुरी हो मगर
प्यार के नाम पर दुश्मनी ठीक है
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SHIV SAFAR
उन से तो दुश्मन ही अच्छे
धोखा तो बोल के देते हैं
Vijay Potter Singhadiya

Inspirational Intiqam Shayari for Self-Worth and Determination

ऐसा बदला हूँ तिरे शहर का पानी पी कर
झूट बोलूँ तो नदामत नहीं होती मुझ को
Shahid Zaki
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ख़ास तो कुछ भी नहीं बदला तुम्हारे बाद में
पहले गुम रहता था तुम में, अब तुम्हारी याद में

मोल हासिल हो गया है मुझको इक-इक शे'र का
सब दिलासे दे रहे हैं मुझको "जस्सर" दाद में
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Avtar Singh Jasser
मेरी ही जान के दुश्मन हैं नसीहत वाले
मुझ को समझाते हैं उन को नहीं समझाते हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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दुश्मनी लाख सही ख़त्म न कीजे रिश्ता
दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए
Nida Fazli
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मिल रहा है गले ज़फ़र दुश्मन
ईद ऐसी बहार लाई है
Zafar Siddqui