इसी फ़कीर की गफ़लत से आगही ली हैमेरे चराग़ से सूरज ने रौशनी ली हैगली-गली में भटकता है शोर करता हुआहमारे इश्क़ ने सस्ती शराब पी ली है— Ammar Iqbal