Ammar Iqbal

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@ammar-iqbal

Ammar Iqbal shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Ammar Iqbal's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm

नज़र से तुम को मिले न कोई सुराग़ दिल का
झुका के गर्दन बुझा लिया है चराग़ दिल का

सुनूँ न कैसे करूँ न क्यूँकर मैं अपने दिल की
मेरे अलावा है कौन इस बद-दिमाग़ दिल का

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मुझको इस लफ़्ज़ का मतलब नहीं मालूम मगर
आपकी हम्म ने मुझे सोच में डाला हुआ है

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रंग-ओ-रस की हवस और बस
मसअला दस्तरस और बस

यूँ बुनी हैं रगें जिस्म की
एक नस टस से मस और बस

Ammar Iqbal
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दिल आज शाम से ही उसे ढूँडने लगा
कल जिस के बा'द कमरे में तन्हाई आई थी

Ammar Iqbal
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इसी फ़कीर की गफ़लत से आगही ली है
मेरे चराग़ से सूरज ने रौशनी ली है

गली-गली में भटकता है शोर करता हुआ
हमारे इश्क़ ने सस्ती शराब पी ली है

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वहशत के कारखाने से ताज़ा ग़ज़ल निकाल
ऐ सब्र के दरख़्त मेरा मीठा फल निकाल

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कैसा मुझ को बना दिया 'अम्मार'
कौन सा रंग भर गए मुझ में

Ammar Iqbal
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कैसे कैसे बना दिए चेहरे
अपनी बे-चेहरगी बनाते हुए

Ammar Iqbal
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ख़ुद ही जाने लगे थे और ख़ुद ही
रास्ता रोक कर खड़े हुए हैं

Ammar Iqbal
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मैं आईनों को देखे जा रहा था
अब इन से बात भी करने लगा हूँ

Ammar Iqbal
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एक दरवेश को तिरी ख़ातिर
सारी बस्ती से इश्क़ हो गया है

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मैंने तस्वीर फेंक दी है मगर
कील दीवार में गड़ी हुई है

Ammar Iqbal
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उसने नासूर कर लिया होगा
ज़ख़्म को शाएरी बनाते हुए

Ammar Iqbal
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मैंने चाहा था ज़ख़्म भर जाएँ
ज़ख़्म ही ज़ख़्म भर गए मुझ में

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एक ही बात मुझ में अच्छी है
और मैं बस वही नहीं करता

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