मुझ को इस लफ़्ज़ का मतलब नहीं मालूम मगर
आप की हम्म ने मुझे सोच में डाला हुआ है
आप की हम्म ने मुझे सोच में डाला हुआ है
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"मेरा रंग उड़ रहा है मेरे बाल झड़ रहे हैं"
मेरा रंग उड़ रहा है मेरे बाल झड़ रहे हैं
मेरे पेच खुल चुके हैं मेरे ख़म बिगड़ रहे हैं
कहीं चुपके चुपके चुपके मेरी बात चल रही है
कहीं कुछ अज़ीज़ मेरे, मेरे पावँ पड़ रहे हैं
मेरा काम कर चुका है, मेरा ख़्वाब मर चुका है
मेरी ख़ुश्क ख़ुश्क आँखों में सराब गड़ रहे हैं
मेरी पसलियाँ चटक कर मेरे मुँह को आ गई हैं
ग़म-ए-तिश्नगी के मारे मेरे दाँत झड़ रहे हैं
मेरी आस्तीं फटी है मुझे चोट लग रही है
मेरी धज्जियाँ उड़ी हैं, मेरे तार उधड़ रहे हैं
मेरे ख़ून की सफ़ेदी तुम्हें क्या बता रही है
ये मुझे जता रही है, मेरे ज़ख़्म सड़ रहे हैें
मेरे सर पे चढ़ के अब तक वही ख़ौफ़ नाचता है
कि तू कब का जा चुका है कि तू कब का जा चुका है
Read Fullमेरे पेच खुल चुके हैं मेरे ख़म बिगड़ रहे हैं
कहीं चुपके चुपके चुपके मेरी बात चल रही है
कहीं कुछ अज़ीज़ मेरे, मेरे पावँ पड़ रहे हैं
मेरा काम कर चुका है, मेरा ख़्वाब मर चुका है
मेरी ख़ुश्क ख़ुश्क आँखों में सराब गड़ रहे हैं
मेरी पसलियाँ चटक कर मेरे मुँह को आ गई हैं
ग़म-ए-तिश्नगी के मारे मेरे दाँत झड़ रहे हैं
मेरी आस्तीं फटी है मुझे चोट लग रही है
मेरी धज्जियाँ उड़ी हैं, मेरे तार उधड़ रहे हैं
मेरे ख़ून की सफ़ेदी तुम्हें क्या बता रही है
ये मुझे जता रही है, मेरे ज़ख़्म सड़ रहे हैें
मेरे सर पे चढ़ के अब तक वही ख़ौफ़ नाचता है
कि तू कब का जा चुका है कि तू कब का जा चुका है
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अक्स कितने उतर गए मुझ में
फिर न जाने किधर गए मुझ में
फिर न जाने किधर गए मुझ में
मैं ने चाहा था ज़ख़्म भर जाएँ
ज़ख़्म ही ज़ख़्म भर गए मुझ में
मैं वो पल था जो खा गया सदियाँ
सब ज़माने गुज़र गए मुझ में
ये जो मैं हूँ ज़रा सा बाक़ी हूँ
वो जो तुम थे वो मर गए मुझ में
मेरे अंदर थी ऐसी तारीकी
आ के आसेब डर गए मुझ में
पहले उतरा मैं दिल के दरिया में
फिर समुंदर उतर गए मुझ में
कैसा मुझ को बना दिया 'अम्मार'
कौन सा रंग भर गए मुझ में
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एक दरवेश को तिरी ख़ातिर
सारी बस्ती से इश्क़ हो गया है
सारी बस्ती से इश्क़ हो गया है
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