नज़र से तुम को मिले न कोई सुराग़ दिल का
झुका के गर्दन बुझा लिया है चराग़ दिल का
सुनूँ न कैसे करूँँ न क्यूँँकर मैं अपने दिल की
मेरे अलावा है कौन इस बद-दिमाग़ दिल का
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