Meaning of

चराग़

charaagh • چراغ

दीपक; प्रकाश; मशाल

lamp; light; beacon

چراغ; روشنی; مشعل

Persian

तुम्हारा सिर्फ़ हवाओं पे शक गया होगा
चराग़ ख़ुद भी तो जल जल के थक गया होगा

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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता
चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता

मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में
जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ​ सोचा नहीं जाता

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दुआ करो कि सलामत रहे मिरी हिम्मत
ये इक चराग़ कई आँधियों पे भारी है

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मुफ़लिसी थी और हम थे घर के इकलौते चराग़
वरना ऐसी रौशनी करते कि दुनिया देखती

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गुजर चुकी जुल्मते शब-ए-हिज्र, पर बदन में वो तीरगी है
मैं जल मरुंगा मगर चिरागों के लो को मध्यम नहीं करूँगा

ये अहद ले कर ही तुझ को सौंपी थी मैं ने कलबौ नजर की सरहद
जो तेरे हाथों से क़त्ल होगा मैं उस का मातम नहीं करूँगा

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चराग़ों को उछाला जा रहा है
हवा पर रौब डाला जा रहा है

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वो बुझ गया तो चला उस की अहमियत का पता
कि उस की आग से कितने चराग़ जलते थे

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नए दौर के नए ख़्वाब हैं नए मौसमों के गुलाब हैं
ये मोहब्बतों के चराग़ हैं इन्हें नफ़रतों की हवा न दे

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कहाँ चराग़ जलाएँ कहाँ गुलाब रखें
छतें तो मिलती हैं लेकिन मकाँ नहीं मिलता

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जहाँ रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा
किसी चराग़ का अपना मकाँ नहीं होता

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तुम्हारा सिर्फ़ हवाओं पे शक गया होगा
चराग़ ख़ुद भी तो जल जल के थक गया होगा

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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता
चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता

मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में
जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ​ सोचा नहीं जाता

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'चराग़' मूल रूप से प्रकाश का साधन है, जो गर्माहट और मार्गदर्शन का प्रतीक है। कविता में, यह अंधकार में आशा का प्रतीक बन जाता है, एक अकेला दीप जो विशाल रात से जूझता है।

कवि अक्सर 'चराग़' का उपयोग दृढ़ता और आशा को दर्शाने के लिए करते हैं। यह मानव आत्मा के अमर प्रकाश का रूपक है। यह अंधकार के विपरीत खड़ा होता है, निराशा और आशा के बीच संघर्ष का प्रतीक।

एक 'चराग़' की शांत लौ में, कवि प्रकाश और छाया के शाश्वत नृत्य को पाते हैं।