गुजर चुकी जुल्मते शब-ए-हिज्र, पर बदन में वो तीरगी हैमैं जल मरुंगा मगर चिरागों के लो को मध्यम नहीं करूँगाये अहद ले कर ही तुझ को सौंपी थी मैं ने कलबौ नजर की सरहदजो तेरे हाथों से क़त्ल होगा मैं उस का मातम नहीं करूँगा— Tehzeeb Hafi