
सुब्ह-ए-मग़रूर को वो शाम भी कर देता है
शोहरतें छीन के गुमनाम भी कर देता है
वक़्त से आँख मिलाने की हिमाकत न करो
वक़्त इंसान को नीलाम भी कर देता है
— Nadeem Farrukh
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