Sahil Verma

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@sh0rr

Sahil Verma shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Sahil Verma's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
याद बनकर लिखा होता दिल पे जो भी
एक आँसू वो सब कुछ मिटा आता है
Sahil Verma
ये ग़ज़ल ग़ैर मुसलसल है पर
इसमें मतला है न ही मक़्ता है
Sahil Verma
एक तो रोटी छुड़ा कर खाता
दूजा रोटी लुटा कर पलता है
Sahil Verma
दूरियों में किसी को राहत है
पास में होने से दम घुटता है
Sahil Verma
होता कुछ और है साहिल आख़िर
सबको कुछ और ही मगर लगता है
Sahil Verma
होता अच्छे के लिए ही सबके
ईश्वर जब भी जो भी करता है
Sahil Verma
वो अपने ही अंदर में ख़ुद से है लड़ता
जो कहता है मुझको नहीं फ़र्क पड़ता
Sahil Verma
दिखते हैं बुरे जो भी होते हैं कभी अच्छे
होते हैं जो वहशी वो ख़ूँखार नहीं दिखते
Sahil Verma
हर बड़ा काम यूँ ही नहीं होता है
करने वाले में भी तो सनक होती है
Sahil Verma
कितनी ही ज़िम्मेदारियाँ बस एक मन में होती हैं
माँ की बहुत सी ख़ूबियाँ हर इक बहन में होती हैं
Sahil Verma
जब भी दिल टूटता है कहीं जो कोई
जाने क्यूँ नाम 'साहिल' तेरा आता है
Sahil Verma
कुछ बातें ख़ुद से भी छिपाई जाती हैं
सारी नहीं सबको बताई जाती हैं
Sahil Verma
बातें जब दिल को काफ़ी जला देती हैं
अस्थियाँ दिल की ये मन बहा आता है
Sahil Verma
जिसका होता नहीं है लचीला बदन
उसकी बातों में काफ़ी लचक होती है
Sahil Verma
काश उसका कॉल आ जाए अधूरी रात को
और फिर हम दोनों में पूरी की पूरी बात हो
Sahil Verma
शब्दों में उतनी अश्लीलता ही नहीं
जितनी मन में किसी के ठरक होती है
Sahil Verma
जिनकी क़िस्मत चमकती नहीं है कभी
उनकी आँखों में ज़्यादा चमक होती है
Sahil Verma
कोई यूँ ही नहीं रोता है रातों में
सबके दिल में कोई तो कसक होती है
Sahil Verma
इस पार के दिखते हैं सब लोग तुझे अपने
कुछ यार तुझे लेकिन उस-पार नहीं दिखते
Sahil Verma
सतयुग में तुझे देखा द्वापर में तुझे देखा
कलयुग में मगर तेरे अवतार नहीं दिखते
Sahil Verma

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