Sahil Verma

Top 10 of Sahil Verma

    सखी को हमारी नज़र लग न जाए
    उसे ख़्वाब में रात भर देखते हैं
    Sahil Verma
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    वहाँ पायलें बजती हैं पाँव से
    सुकूँ मिलता है पेड़ की छाँव से

    यहाँ सब है पर तू नहीं है सखी
    नहीं कुछ भी प्यारा तेरे गाँव से
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    Sahil Verma
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    शरारत करती है वो जिस तरह से
    मुझे अब उस से उलफ़त हो रही है

    भले अनजान है वो इस से लेकिन
    उसे भी मेरी चाहत हो रही है
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    Sahil Verma
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    चाहिए अब कोई और नहीं
    चाहिए सिर्फ़ तेरा ही संग

    गर नहीं तू मिली मुझ को तो
    मैं तुझी में रहूँगा मलंग
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    Sahil Verma
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    आरज़ू थी ये, कोई लगा ले गले
    अब मगर सब की बाँहों से डर लगता है
    Sahil Verma
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    इस जहाँ में दोस्त सब को सच्चे कैसे मिलते हैं
    ये बताओ कोई अक्सर अच्छे कैसे मिलते हैं

    हाथ तक तो मैं ने लड़की से मिलाया है नहीं
    कोई बतलाओ गले लड़की से कैसे मिलते हैं
    इश्क़ में भी हाँ मुनाफ़े मिलते हैं लोगों मगर
    ये बताओ कोई यारी में ये कैसे मिलते हैं

    सोचता हूँ मैं, ये जीवन कैसे बीतेगा मेरा
    ये बताओ जीने के और रस्ते कैसे मिलते हैं

    खो गई वो मेरी अच्छी दोस्त मुझ से ही कहीं
    ये बताओ कोई कल के बिछड़े कैसे मिलते हैं
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    Sahil Verma
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    क्यूँ न शाइरों की महफ़िल सजाई जाए
    अपनी-अपनी दास्ताने-ग़म सुनाई जाए

    जो बात हम ने किसी ख़ास से ना कही
    क्यूँ न वो इस महफ़िल में बताई जाए

    महबूबास मोहब्बत ना जता सके यारों
    तो इस महफ़िल में मोहब्बत जताई जाए

    पैसे-वैसे तो जैसे-तैसे कमा ही लेंगे हम
    क्यूँ न महफ़िल में इज़्ज़त कमाई जाए

    हम लोग दर्द से भरी बोतलें हैं भाईयों
    सबकी तरफ़ से एक एक पिलाई जाए
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    Sahil Verma
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    " दोस्ती "
    ये दोस्ती क्या है यारी है क्या ?
    मोहब्बत से कम प्यारी है क्या ?

    लोग कहते हैं प्यार बड़ा है जग में,
    प्यार वाली दोस्ती हमारी है क्या ?

    दोस्त इश्क़ तू कर लेगा पर ये बता,
    इस के आगे कोई जानकारी है क्या ?

    दोस्ती में कोई समझौता होता नहीं,
    इस से बड़ी कोई जिम्मेदारी है क्या ?

    दोस्ती में कोई छोटा-बड़ा नहीं होता,
    भेद-भाव करना समझदारी है क्या ?
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    Sahil Verma
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