is jahaan men dost sab ko sacche kaise milte hain | इस जहाँ में दोस्त सब को सच्चे कैसे मिलते हैं

  - Sahil Verma

इस जहाँ में दोस्त सब को सच्चे कैसे मिलते हैं
ये बताओ कोई अक्सर अच्छे कैसे मिलते हैं

हाथ तक तो मैं ने लड़की से मिलाया है नहीं
कोई बतलाओ गले लड़की से कैसे मिलते हैं
'इश्क़ में भी हाँ मुनाफ़े मिलते हैं लोगों मगर
ये बताओ कोई यारी में ये कैसे मिलते हैं

सोचता हूँ मैं, ये जीवन कैसे बीतेगा मेरा
ये बताओ जीने के और रस्ते कैसे मिलते हैं

खो गई वो मेरी अच्छी दोस्त मुझ से ही कहीं
ये बताओ कोई कल के बिछड़े कैसे मिलते हैं

  - Sahil Verma

Dost Shayari

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