वो मेरी दुनिया का हिस्सा थी मेरी दुनिया नहीं
इक शजर कटने से वन वीरान हो जाएगा क्या
इक शजर कटने से वन वीरान हो जाएगा क्या
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फोन भी आया तो शिकवे के लिए
फूल भी भेजा तो मुरझाया हुआ
फूल भी भेजा तो मुरझाया हुआ
रास्ते की मुश्किलें तो जान लूँ
आता होगा उस का ठुकराया हुआ
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सारी दुनिया की निगाहों से बचाकर रखना,
अपनी आँखों में ही हर दर्द का ज़ेवर रखना
अपनी आँखों में ही हर दर्द का ज़ेवर रखना
उस को आदत ये परेशान बहुत रक्खेगी,
उस की आदत थी मेरा हाथ पकड़ कर रखना
इस का क्या शिकवा उसे रोक नहीं पाए हम,
एक मुफ़लिस को कहाँ आता है ज़ेवर रखना
हाए! वो इश्क़ छिपाने के ज़माने मोहन!
याद आता है ग़लत नाम से नंबर रखना
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जो शे'र समझे मुझे दाद वाद देता रहे
गले लगाए जिसे ग़म समझ में आ जाए
गले लगाए जिसे ग़म समझ में आ जाए
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फोन भी आया तो शिकवे के लिए
फूल भी भेजा तो मुरझाया हुआ
फूल भी भेजा तो मुरझाया हुआ
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हाए वो इश्क़ छुपाने के ज़माने 'मोहन'
याद आता है ग़लत नाम से नंबर रखना
याद आता है ग़लत नाम से नंबर रखना
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