ABhishek Parashar

ABhishek Parashar

@theabhishekparashar

ABhishek Parashar 'Mental' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in ABhishek Parashar 'Mental''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

ख़ुद-कुशी करना गर गुनाह है तो मय-कशी से लगा ले दिल अपना — ABhishek Parashar
खा जाएगा जोश-ए-जवानी को ये इश्क़ लकड़ी को खा लेती है दीमक जिस तरह — ABhishek Parashar
तेरी मोहब्बत में हम अपना दिल लुटा के बैठे हैं हम तुझ को अपनी धड़कनों में यूँॅं बसा के बैठे हैं — ABhishek Parashar
मैं तो उस की पसंद था ही नहीं वो जो मुझ को पसंद आया था — ABhishek Parashar
इतना आसान थोड़ी है ये युद्ध कुछ तो नुक़सान हम को भी होगा — ABhishek Parashar
मियाँ एक भी कुर्सी ख़ाली नहीं है मेरे साथ बैठी है तन्हाई मेरी — ABhishek Parashar
तू मुसलमान और हिंदू बन मैं तो इंसान बनने आया हूँ — ABhishek Parashar
लोग धर्मों में बँट गए वर्ना दुनिया इतनी बुरी नहीं थी दोस्त — ABhishek Parashar
रात को थक के सोता है दिन और दिन में आराम रात करती है — ABhishek Parashar
लोग रंज-ओ-ग़म छुपा कर अपना अपना मुस्कुरा के मिलते हैं इक दूसरे से — ABhishek Parashar
दम-साज़ तू ग़म-ख़्वार तू तू ही मेरा संसार है तू है तमन्ना मेरे दिल की तू ही मेरा प्यार है — ABhishek Parashar
है जुस्तुजू तेरी मुझे तू नूर है महताब का तू ज़िंदगी तू आशिक़ी तू ख़्वाब है हर ख़्वाब का — ABhishek Parashar
इक तरह से ये ख़ुद-कुशी है दोस्त जंग कोई मज़ाक़ थोड़ी है — ABhishek Parashar
दुनिया की फ़िक्र करने वालो सुनो तुम को खा लेंगे लोग दुनिया के — ABhishek Parashar
एक लड़की लगी है अच्छी सो ज़ेहन से दिल का मश्वरा होगा — ABhishek Parashar
कैसी दुनिया बनाई है ये ख़ुदा आदमी आदमी को खाता है — ABhishek Parashar
मेरे पास इक यार ऐसा नहीं जो चाहे मुझे मेरी दौलत बग़ैर — ABhishek Parashar
क़त्ल करना था तीरगी का सो दिल जला कर की रौशनी मैं ने — ABhishek Parashar

Ghazal

एक मुद्दत से अधूरी दास्ताँ है क्या करूँ मैं सफ़र में हूँ मगर सब राएगाँ है क्या करूँ मेरा दिल उजड़ा हुआ इक बोस्ताँ है क्या करूँ और माली मेरा बे-नाम-ओ-निशाँ है क्या करूँ कब से वस्ल-ए-यार की है आरज़ू नादाँ मगर हिज्र उस के और मेरे दरमियाँ है क्या करूँ आलम-ए-तन्हाई में ये दर्द-ए-दिल बढ़ता गया मैं ज़मीं हूँ मेरा दिलबर आसमाँ है क्या करूँ साथ जिस के कहकशाँ के पार जाना था मुझे वो मेरे दर-पेश बैठा जाँ-सिताँ है क्या करूँ मर्द भी हूँ हौसला भी है हुनर भी है मगर लड़कियों के दस्तरस में ये जहाँ है क्या करूँ क़द्र क्या होगी हुनरमंदों की ऐ अहल-ए-हुनर हर तरफ़ झूठी चमक का कारवाँ है क्या करूँ मय-कशी और शाइरी से दिल बहलता है मगर मुब्तला-ए-इश्क़ में दिल ग़म-कशाँ है क्या करूँ — ABhishek Parashar
मेरी उजड़ी है दुनिया कौन देखेगा ग़म-ए-दिल का तमाशा कौन देखेगा सभी खोए रहेंगे गर उजालों में मेरे दिल का अँधेरा कौन देखेगा नज़ारे ख़ूब-सूरत हैं बहुत लेकिन ख़ुदाया इनको तन्हा कौन देखेगा तुम्हारे साथ ही सब ख़त्म कर देंगे तुम्हारे बा'द दुनिया कौन देखेगा पुरानी दुनिया में लगता नहीं है दिल नई दुनिया का सपना कौन देखेगा सभी गुम होते जाएँगे अँधेरे में तो दुनिया का उजाला कौन देखेगा सभी को चाँद हो जाएगा हासिल दोस्त तो ये टूटा सितारा कौन देखेगा ज़वानी तक ही देगी साथ वो मेरा तो फिर मेरा बुढ़ापा कौन देखेगा सभी को इश्क़ हो जाएगा हासिल तो तेरे दर को ख़ुदाया कौन देखेगा मैं अक्सर राह चलते सोचता हूँ ये अब उन का आना जाना कौन देखेगा — ABhishek Parashar
यही सौदा हुआ था मेरा ग़म में ज़िंदगी के साथ किसी भी हाल में जाना नहीं है ख़ुद-कुशी के साथ मेरी ख़ुशियों में शामिल था भले सारा ज़माना दोस्त मगर अपने ग़मों को काटा मैं ने शा'इरी के साथ यहाँ पे कौन अपने दिल में रक्खेगा मुझे यारो मैं उस के शहर में आया हुआ हूँ मुफ़्लिसी के साथ ख़ुदाया और कितने दिन मुझे मर मर के जीना है वो कब तक मुझ सेे यूँँ मिलती रहेगी बे-रुख़ी के साथ बचाया करता था जो पल जो लम्हे उस की ख़ातिर मैं बिताने पड़ रहे हैं बेबसी में मय-कशी के साथ अगर मुझ सेे मोहब्बत उस को होती ही नहीं है तो ये मेरी ज़िंदगी कट जाए उस की दोस्ती के साथ मुझे उस के पिता से माँगना है हाथ उस का सो मिलाना पड़ रहा है हाथ मुझ को नौकरी के साथ — ABhishek Parashar

Nazm

'हम लड़के हैं' आज आप को सब सच-सच बताते हैं हम किस लिए इतना मुस्कुराते हैं हम को रोना भी आए तो कहाँ रो पाते हैं कोई देख न ले रोता हुआ ये सोच कर डर जाते हैं दर्द सहते हैं और अपने आसुओं को पी जाते हैं हम वो हैं जिन्हें अपने अश्क बहाने से रोका जाता है जिन्हें अपना दर्द सुनाने से रोका जाता है हम वो हैं जो ख़ुद ही ख़ुद का मज़ाक़ बनाते हैं और फिर एक दूजे से सच छिपाते हैं हम सब कुछ कर सकते हैं मगर कभी खुल कर रो नहीं सकते हमारा दर्द हमारे सिवा इस दुनिया में कहाँ कोई समझ पाता है सुख में खुल के हँसते हैं और दुख में झूठ-मूठ का मुस्कुराना आता है हम लड़के हैं साहब हमें बचपन से बस यही सिखाया गया है लड़के रोते नहीं हैं ये बोल-बोल कर पत्थर दिल बनाया गया है अपने मन की करने वाला इस समाज की नज़र में हर लड़का बुरा है अपने आसुओं को पी जाओ दोस्तों हम लड़के हैं हमें रोना मना है — ABhishek Parashar