मोहब्बत के अलावा दुनिया में क्या कुछ नहीं होता
मगर मुझ से मोहब्ब्त के अलावा कुछ नहीं होता
मुझे कहती है उसको रूह वाला प्यार करना है
उसे अब कौन समझाए कि ऐसा कुछ नहीं होता
कभी मिल भी लिया कर रात के गहरे अँधेरों में
तेरी तस्वीर से जान ए जाँ मेरा कुछ नहीं होता
बता क्यूँ मिलती है आकर मुझे तू बंद कमरे में
तुझे जब साथ मेरे करना वरना कुछ नहीं होता
मोहब्बत करने से डरते रहे हम उम्रभर और फ़िर
हुआ मालूम इस
में डरने जैसा कुछ नहीं होता
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