ग़म मुझे अपना भुला कर देखना है
ज़िंदगी को मुस्कुरा कर देखना है
रह लिया तन्हा बहुत मैं अब किसी के
दिल में अपना घर बना कर देखना है
वो पुराना साल था ये तो नया है
अब तो थोड़ी सी वफ़ा कर देखना है
सब रक़ीबों से मुझे मिलवा किसी दिन
मुझको अपना दिल जला कर देखना है
वस्ल तो मुमकिन नहीं यारो मुझे अब
हिज्र में ख़ुद को मिटा कर देखना है
याद आना छोड़ दो गर तुम मुझे तो
फिर किसी से दिल लगा कर देखना है
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