
मुसाफ़िरत जब शुरू करेंगे तो पहले सू-ए-हरम चलेंगे
हम अपने दस्त-ए-अदब में ले कर वफ़ा-ओ-हक़ का अलम चलेंगे
सदा सदा को बुलन्द अपनी करेंगे मज़लूमियत के हक़ में
सदा मज़म्मत करेंगे ज़ुल्मत की राह-ए-हक़ पर क़दम चलेंगे
— Shajar Abbas
Other sher from the same pen
Shers of bimar.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling