हुस्न-ए-मुतलक़ पर करो तहरीर नज़्में हाए हाए
हुस्न-ए-निस्वाँ पर हैं सब तहरीर ग़ज़लें हाए हाए
देखकर हाल-ए-शिकस्ता हज़रत-ए-फ़रहाद का
दिल से आती हैं ये रह रह कर सदाएँ हाए हाए
बोलता कोई नहीं मज़लूम-ओ-बेकस के लिए
बन गए हैं देखिए सब ज़िन्दा लाशें हाए हाए
घुट रहा है आलम-ए-इंसानियत में दम मेरा
कितनी ज़हरीली हैं ये आब-ओ-हवाएँ हाए हाए
ओढ़ कर हम ख़ाक की चादर हज़ारों साल से
भरते हैं दश्त-ए-जुनूँ में तन्हा आहें हाए हाए
दुश्मन-ए-जाँ हो गया भाई का भाई ऐ ख़ुदा
ख़त्म दुनिया से हुईं सारी वफ़ाएँ हाए हाए
कोई हमदम अपना कोई मोनिस-ओ-यावर नहीं
दास्तान-ए-दर्द-ए-दिल किसको सुनाएँ हाए हाए
ज़ुल्फ़-ए-नागिन लहजा शीरीं और उस पर सादगी
हैं क़यामत-खेज़ सब उसकी अदाएँ हाए हाए
ज़ेर-ए-पा रौंदे गए सब हसरत-ओ-अरमाँ सनम
जानिब-ए-सहरा से ये आईं सदाएँ हाए हाए
ऐ मता-ए-जान कसरत से तेरे दीदार के
मुंतज़िर हैं ये शजर दरिया ये झीलें हाए हाए
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