Mohammad Rafi Sauda

Mohammad Rafi Sauda

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Mohammad Rafi Sauda shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Mohammad Rafi Sauda's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

आशिक़ की भी कटती हैं क्या ख़ूब तरह रातें दो-चार घड़ी रोना दो-चार घड़ी बातें — Mohammad Rafi Sauda
तिरा ख़त आने से दिल को मेरे आराम क्या होगा ख़ुदा जाने कि इस आग़ाज़ का अंजाम क्या होगा — Mohammad Rafi Sauda
गिला लिखूँ मैं अगर तेरी बेवफ़ाई का लहू में ग़र्क़ सफ़ीना हो आश्नाई का — Mohammad Rafi Sauda
न कर 'सौदा' तू शिकवा हम से दिल की बे-क़रारी का मोहब्बत किस को देती है मियाँ आराम दुनिया में — Mohammad Rafi Sauda
कैफ़िय्यत-ए-चश्म उस की मुझे याद है 'सौदा' साग़र को मेरे हाथ से लीजो कि चला मैं — Mohammad Rafi Sauda
ये रंजिश में हम को है बे-इख़्तियारी तुझे तेरी खा कर क़सम देखते हैं — Mohammad Rafi Sauda
कौन किसी का ग़म खाता है कहने को ग़म-ख़्वार है दुनिया — Mohammad Rafi Sauda
'सौदा' जो बे-ख़बर है वही याँ करे है ऐश मुश्किल बहुत है उन को जो रखते हैं आगही — Mohammad Rafi Sauda
फ़िक्र-ए-मआश इश्क़-ए-बुताँ याद-ए-रफ़्तगाँ इस ज़िंदगी में अब कोई क्या क्या किया करे — Mohammad Rafi Sauda
जब यार ने उठा कर ज़ुल्फ़ों के बाल बाँधे तब मैं ने अपने दिल में लाखों ख़याल बाँधे — Mohammad Rafi Sauda

Ghazal

जब यार ने उठा कर ज़ुल्फ़ों के बाल बाँधे तब मैं ने अपने दिल में लाखों ख़याल बाँधे दो दिन में हम तो रीझे ऐ वाए हाल उन का गुज़रे हैं जिन के दिल को याँ माह-ओ-साल बाँधे तार-ए-निगह में उस के क्यूँँकर फँसे न ये दिल आँखों ने जिस के लाखों वहशी ग़ज़ाल बाँधे जो कुछ है रंग उस का सो है नज़र में अपनी गो जामा ज़र्द पहने या चीरा लाल बाँधे तेरे ही सामने कुछ बहके है मेरा नाला वर्ना निशाने हम ने मारे हैं बाल बाँधे बोसे की तो है ख़्वाहिश पर कहिए क्यूँँकि उस से जिस का मिज़ाज लब पर हर्फ़-ए-सवाल बाँधे मारोगे किस को जी से किस पर कमर कसी है फिरते हो क्यूँँ प्यारे तलवार ढाल बाँधे दो-चार शे'र आगे उस के पढ़े तो बोला मज़मूँ ये तू ने अपने क्या हस्ब-ए-हाल बाँधे 'सौदा' जो उन ने बाँधा ज़ुल्फ़ों में दिल सज़ा है शे'रों में उस के तू ने क्यूँँ ख़त्त-ओ-ख़ाल बाँधे — Mohammad Rafi Sauda