nidhaal tha nidhaal ko yuñ aur nidhaal kar diya | निढाल था निढाल को यूँँ और निढाल कर दिया

  - Shajar Abbas

निढाल था निढाल को यूँँ और निढाल कर दिया
बिछड़ते वक़्त उसने मिलने का सवाल कर दिया

तिरी गली से जाऊँगा तो तेरी याद आएगी
इसी ख़याल ने मिरा गुज़र मुहाल कर दिया

बड़ा कमाल है ये अपनी सल्तनत को छोड़ना
है फ़ख़्र का मक़ाम आपने कमाल कर दिया

हमारे हाल-ए-दिल पे आँखें ख़ूँ के अश्क रोई हैं
हमारे दिल का 'इश्क़ तूने कैसा हाल कर दिया

यक़ीन कर हसीं बशर जो कह रहा हूँ सब है सच
हाँ हुस्न ने तिरे तुझे ही बेमिसाल कर दिया

  - Shajar Abbas

Aadmi Shayari

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