yaadon men aapki naya manzar banaa diya | यादों में आपकी नया मंज़र बना दिया

  - Shajar Abbas

यादों में आपकी नया मंज़र बना दिया
सहरा को हमने आज समुंदर बना दिया

तक़लीद कर के दिल ने तुम्हारी अदाओं की
तारीकियों को मेरा मुक़द्दर बना दिया

ज़र्रा नवाज़ियों ने किसी बादशाह की
मुझसे हक़ीर को भी सिकंदर बना दिया

मैंने जो उसके हुस्न पे डाली ज़रा नज़र
पल भर में उसने नज़रों को ख़ंजर बना दिया

आँखों ने मेरी जाग के ख़्वाबों से जंग की
फ़ुर्क़त ने तेरी ख़्वाबों को बे घर बना दिया

चू
में बुलंदियों ने क़दम मेरे आन कर
जब ख़ुद को तेरे दर का गदागर बना दिया

फ़रहाद देख हाथों से मैंने तराश कर
पत्थर को एक क़ीमती गौहर बना दिया

चर्चा है आज कल ये अज़ीज़ों में ऐ शजर
सोहबत ने आपकी हमें बेहतर बना दिया

  - Shajar Abbas

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