khuda se bahr-e-khuda kar bahut udaas hooñ main | ख़ुदा से बहर-ए-ख़ुदा कर बहुत उदास हूँ मैं

  - Shajar Abbas

ख़ुदा से बहर-ए-ख़ुदा कर बहुत उदास हूँ मैं
तू मेरे हक़ में दुआ कर बहुत उदास हूँ मैं

लबों पे शिकवा सजा कर बहुत उदास हूँ मैं
ये सुब्ह शाम सना कर बहुत उदास हूँ मैं

न ख़ुश हो मुझको हरा कर बहुत उदास हूँ मैं
तू इसकी कुछ तो हया कर बहुत उदास हूँ मैं

सुकून-ओ-चैन से रहता था रोज़ सहरा में
और अब ये बस्ती बसा कर बहुत उदास हूँ मैं

दिल-ओ-दिमाग़ में रहते था वो मैं हँसता था
पर अब शजर को भुला कर बहुत उदास हूँ मैं

नहीं हैं बात पे मेरी अगर यक़ीन तुम्हें
तो ख़ुद ही देख लो आ कर बहुत उदास हूँ मैं

तुम अब से पहले मेरे सीने में धड़कते थे
ये बात सब को बता कर बहुत उदास हूँ मैं

वो इस जहाँ में जहाँ भी हों अब पलट आए
सबा बता उसे जाकर बहुत उदास हूँ मैं

हमेशा ज़ुल्फ़ें मेरी तुम बनाया करते थे
ख़ुद अपनी ज़ुल्फ़ें बना कर बहुत उदास हूँ मैं

कहा क़फ़स में परिंदे ने ये परिंदे से
ख़बर रिहाई की पाकर बहुत उदास हूँ मैं

क़सम ख़ुदा की कलाई से हाँ शजर ज़ैदी
तुम्हारा नाम मिटा कर बहुत उदास हूँ मैं

  - Shajar Abbas

Khafa Shayari

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