Prince

Prince

@_Prince_

Prince shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Prince's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

5

Content

50

Likes

31

Shayari
Audios
  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm

Sher

देखने निकले थे उस बे-वफ़ा को आख़री बार और वो आख़री था बस जिसे हम ने देखा — Prince
एक मुद्दत से नहीं देखा है ख़ुद को मैं ने इक बुत-ए-आईना-सीमा का तलबगार हूँ मैं — Prince
कर लिया तबाह मैं ने ख़ुद को मेरी जान देख तेरे दिल की थी ये आरज़ू सो पूरी कर चले — Prince
हम सेे पूछ तू दुनियादारी किस को कहते हैं हम ने इस ख़राबे में एक उम्र काटी है — Prince
जिस का नाम मुहब्बत है हम को उस से वहशत है — Prince
डूब जाता है ये दिल भी साथ आफ़ताब के हर सियाह रात मेरा ज़ब्त आज़माती है — Prince
बदलता रहता हूँ मैं अपना घर यारों मुसलसल किसी इक दिल में रहना मेरी फितरत में नहीं है — Prince
मुन्तशिर हैं अब कि सारे ख़्वाब मेरी आँखों में कोई ले गया समेट कर के नींद आँखों की — Prince
कुछ न कुछ तो चाहिए सभी को इस जहान में कौन मुतमइन है ऐ ख़ुदा तेरी अमान में — Prince
नहीं मारता फ़िराक़ आदमी को आदमी को तो यादें मारतीं हैं — Prince
एक दूजे को देख के बाहम संग पिघला हुआ था मोम के साथ — Prince
बा'द तेरे नहीं कोई हमें मंज़िल की तलब हम ने सोचा है कि हम राह भटक जाएँगे — Prince
रोक रहा हूँ मैं तुम्हें, इस की वजह है कोई यार जाते हुए को रोकना, वरना मेरा मिज़ाज नइँ — Prince
अंदर ही अंदर काफ़ी उलझा सा हूँ मैं पर देखने से सब को सुलझा लगता हूँ — Prince
मेरे साथ दफ़्न हो न जाए दिल में जो भी है सोचा जाते जाते शिकवा तुम सेे करता जाऊँ मैं — Prince
तेरी यादों की तारीकी में जाँ हम अपना दिल जलाया करते हैं — Prince
कई और भी राहें जाती थी मंज़िल को यारों मगर हम ही उस की गली में से होकर के निकले — Prince
मरना जब मैं ने तन्हा है तो फिर, हर्ज़ ही क्या है तन्हा जीने में. — Prince

Ghazal

मंज़िल ही जब सराब हो जाए तो क्या करें हर आरज़ू अज़ाब हो जाए तो क्या करें कुछ दिन अगरचे हिज्र में गुज़रें तो ख़ैर है हर पल ही इज़तिराब हो जाए तो क्या करें ये ज़ख़्म हम को काँटों से मिलते तो ठीक था ज़ालिम ही जब गुलाब हो जाए तो क्या करें हर क़ैदी चाहता है रिहाई मिले उसे पर क़ैद इंतिखाब हो जाए तो क्या करें मुद्दत के बा'द आया हो महबूब सपने में और नींद गर ख़राब हो जाए तो क्या करें जिस के लिए की कत'अ सितारों से दोस्ती दुश्मन वो माहताब हो जाए तो क्या करें जिस के सहारे मैं ने किनारे पे जाना था वो तिनका गर्क-ए-आब हो जाए तो क्या करें मालूम था जवाब जिसे हर सवाल का वो प्रिंस लाजवाब हो जाए तो क्या करें — Prince
इस कफ़स से एक दूजे की रिहाई करते हैं मेरे दोस्त चल कि हम भी बे-वफ़ाई करते हैं जब तलक थे साथ हम जुदा थे अपने रास्ते, अब बिछड़ के मेरे यार हम-नवाई करते हैं. अब जो बिछड़े हैं तो क्यूँँ न कुछ नया सा करते हैं पीठ पीछे एक दूजे की बुराई करते हैं ये सुना था लोग हिज्र में हैं करते शा'इरी, क्यूँँ न हम भी अब कोई ग़ज़ल-सराई करते हैं इस मरीज़ दिल की अब तबीब क्या दवा करे, ज़ख्म-ए-दिल की ख़ुद ही यार हम दवाई करते हैं इश्क़ के सफ़र में थाम लो मेरा ये हाथ तुम, चलते चलते हम कि ख़ुल्द तक रसाई करते हैं कुछ न कुछ तो होना चाहिए बिछड़ने का जवाज़, चल कि शिकवा करते हैं कोई लड़ाई करते हैं ये ज़माना तो न जान पाया अपने मसअले, प्रिंस चल दर-ए-ख़ुदा पे अब दुहाई करते हैं — Prince
वफ़ा की सम्त अज़ीयत के सिवा कुछ भी नहीं जो भी उस ओर गया उस का रहा कुछ भी नहीं जिसे हम देखके हो जाते थे बेसुध से कभी उस की आँखों के मुक़ाबिल ये नशा कुछ भी नहीं कैसे कह दूँ के मेरा उस से तअल्लुक़ ही नहीं मैं ने उस के सिवा तो यारों लिखा कुछ भी नहीं वो भी बेचैन रहा जिस ने मुहब्बत नहीं की इश्क़ जिस ने भी किया उस का बचा कुछ भी नहीं एक रहज़न मेरे दिल को यूँँ गया लूट के दोस्त कि सिवा ग़म के मेरे दिल में बचा कुछ भी नहीं हम ग़म-ए-हस्ती से उकताए भी जाएँगे कहाँ चारा-ए-ज़िन्दगी मरने के सिवा कुछ भी नहीं वो गया तो मेरा दिल भी नहीं लौटाके गया यारों इस के सिवा तो उस सेे गिला कुछ भी नहीं मैं भला क्यूँ न करुँ ज़िन्दगी से शिकवा कोई ज़िन्दगी ने सिवा ग़म मुझ को दिया कुछ भी नहीं यारों फ़िलहाल तो मैं ऐसे सफ़र में हूँ जहाँ मेरी मंज़िल कहाँ है मुझ को पता कुछ भी नहीं सोचता हूँ के दिल-ए-ख़स्ता को दफ़ना दूँ कहीं इस ग़म-ए-दिल की वगरना तो दवा कुछ भी नहीं आज वो ही हमें मरने की दुआ देता है जो कभी कहता था हम सेे के दुआ कुछ भी नहीं ख़त जलाने से कहाँ जलती हैं यादें आख़िर ख़ाक-बेज़ी के सिवा हम को मिला कुछ भी नहीं तुम ने जिस को था बनाया कभी अपने हाथों सो वही आदमी कहता है ख़ुदा कुछ भी नहीं अब उसे क्या कहूँ आख़िर के मुहब्बत क्या है प्रिंस जिस को ये भरम है कि वफ़ा कुछ भी नहीं — Prince

Nazm

''प्यारे दादा'' तू गया तो जैसे दिल का क़रार चला गया तेरे साथ वो तेरा सारा प्यार चला गया तू नहीं जानता तेरे बा'द क्या ख़सारा हुआ आँखें दरिया हो गईं दिल बेचारा हुआ वो जो किसी चमन में बहार के जैसा था मेरे सर से तेरे साया चला गया वो ज़िन्दगी का क़ीमती सरमाया चला गया तेरे साथ ही कई राजे और रानियाँ चली गईं तू गया तो तेरे साथ कहानियाँ चली गईं मुझे याद है तेरे साथ जो मेले देखे थे सुख सबने दुख तू ने अकेले देखे थे वो ख़ुशी याद हैं जो तेरे खेत से वापस आने की होती थी वो तेरे प्यार से बुलानी की होती थी वो तेरे दिए हुए बोसे की बात कुछ और थी वो जेब ख़र्ची को दिए हर सिक्के की बात कुछ और थी फ़िलहाल तो तू नहीं पर तेरी दुआएँ साथ हैं तेरी यादें तेरी सिखाई बातें साथ हैं बस ख़ुदा से यही दुआ है के तुझे अपनी अमान में रक्खे तू जहाँ रहे ख़ुश रहे, बस यही मेरी दुआ है कभी कभी सपने में आ कर रू-दाद बता जाना बस और मेरे दिल को चाहिए क्या है — Prince