Prince
Prince
Ghazal

समझदारी से तो जाना सदा व्यापार होता है

जो नादानी में हो जाए वही तो प्यार होता है

कि राह-ए-ज़िन्दगी में तो मुसाफ़िर हैं बहुत मिलते
चले जो साथ आख़िर तक वही तो यार होता है

बनानी पड़ती है कश्ती वफ़ादारी की ऐ काफ़िर
तभी जा कर तो दरिया-ए-मुहब्बत पार होता है

हो जाती है मुहब्बत प्रिंस हर इक रोज़ हम को तो,
कोई फिर क्यूँ कहे ये प्यार बस इक बार होता है

— Prince

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