समझदारी से तो जाना सदा व्यापार होता है
जो नादानी में हो जाए वही तो प्यार होता है
कि राह-ए-ज़िन्दगी में तो मुसाफ़िर हैं बहुत मिलते
चले जो साथ आख़िर तक वही तो यार होता है
बनानी पड़ती है कश्ती वफ़ादारी की ऐ काफ़िर
तभी जा कर तो दरिया-ए-मुहब्बत पार होता है
हो जाती है मुहब्बत प्रिंस हर इक रोज़ हम को तो,
कोई फिर क्यूँ कहे ये प्यार बस इक बार होता है
— Prince















