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Tohfa Shayari

Here is a curated collection of Tohfa shayari in Hindi. You can download HD images of all the Tohfa shayari on this page. These Tohfa Shayari images can also be used as Instagram posts and whatsapp statuses. Start reading now and enjoy.

तुम अगर सीखना चाहो मुझे बतला देना
आम सा फ़न तो कोई है नहीं तोहफ़ा देना

एक ही शख़्स है जिसको ये हुनर आता है
रूठ जाने पे फ़ज़ा और भी महका देना

हुस्न दुनिया मे इसी काम को भेजा गया है
के जहाँ आग लगी हो उसे भड़का देना

उन बुजुर्गो का यही काम हुआ करता था
जहाँ ख़ूबी नज़र आई उसे चमका देना

दिल बताता है मुझे अक्ल की बातें क्या क्या
बंदा पूछे के तेरा है कोई लेना देना

और कुछ याद न रहता था लड़ाई में उसे
हाँ मगर मेरे गुजिश्ता का हवाला देना

उसकी फ़ितरत में न था तर्क-ए-तअल्लुक़ लेकिन
दूसरे शख़्स को इस नहद पे पहुँचा देना

जानता था कि बहुत खाक उड़ाएगा मेरी
कोई आसान नहीं था उसे रस्ता देना

क्या पता ख़ुद से छिड़ी जंग कहाँ ले जाए
जब भी याद आऊँ मेरी जान का सदका देना
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Jawwad Sheikh
दाग़ दुनिया ने दिए ज़ख़्म ज़माने से मिले
हम को तोहफ़े ये तुम्हें दोस्त बनाने से मिले

हम तरसते ही तरसते ही तरसते ही रहे
वो फ़लाने से फ़लाने से फ़लाने से मिले

ख़ुद से मिल जाते तो चाहत का भरम रह जाता
क्या मिले आप जो लोगों के मिलाने से मिले

माँ की आग़ोश में कल मौत की आग़ोश में आज
हम को दुनिया में ये दो वक़्त सुहाने से मिले

कभी लिखवाने गए ख़त कभी पढ़वाने गए
हम हसीनों से इसी हीले बहाने से मिले

इक नया ज़ख़्म मिला एक नई उम्र मिली
जब किसी शहर में कुछ यार पुराने से मिले

एक हम ही नहीं फिरते हैं लिए क़िस्सा-ए-ग़म
उन के ख़ामोश लबों पर भी फ़साने से मिले

कैसे मानें कि उन्हें भूल गया तू ऐ 'कैफ़'
उन के ख़त आज हमें तेरे सिरहाने से मिले
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Kaif Bhopali
तुमको भी ग़र ठोकर में अपनी ये ज़माना चाहिए
अमा मियाँ कुछ तो हुनर तुमको भी आना चाहिए

आते हैं तेरी गली हर रोज़ फ़क़त दीदार वास्ते
कभी - कभी तुम्हें भी मेरी गली आना चाहिए

तोहफे में मिला गुलाब हाथों में लिए फिरते हो
इश्क़ है अभी नया नया इसे अभी छुपाना चाहिए

ख़्वाबों में ही आना मिलने मुझसे तुम हर बार
दरमियाँ अपने नहीं मुझको ये ज़माना चाहिए

आशिक़ हूँ तुम्हारा मुझे आवारा न समझना तुम
यूँ बेरुख़ी से इश्क़ नहीं आज़माना चाहिए

कितनी हसरत लिए आते हैं गली में तुम्हारी
तुम्हें भी तो एक दफ़ा दरीचे तक आना चाहिए

अच्छी लगती है अना शख़्सियत पर तुम्हारी
कुछ गुरुर हमें भी अब खुद पर आना चाहिए

रूठने का हक़ तुम्हारा ही नहीं मेरा भी तो है
मैं जो रूठूँ कभी तुम्हे भी मुझे मनाना चाहिए
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Prashant Shakun

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