
संसार को बेहद ज़ालिम जान लिया मैं ने
फिर उस से मिला हाथों को चूम दिया मैं ने
जो उस ने किताब-ए-ग़म तोहफ़े में मुझे दी थी
इक पन्ना ये याद-ए-रफ़्ता चूम लिया मैं ने
— Pritam sihag
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