Pritam sihag

Pritam sihag

@Pritam_sihag

Pritam sihag shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Pritam sihag's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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  • Nazm

रिवीज़न सौ दफ़ा कर के था मैं आया
क़िताबों के मैं पर्चे भी बना लाया

मैं बैठा इश्क़ के इस इम्तिहाँ में जब
तो पेपर ही सिलेबस से परे आया

Pritam sihag

अनजान सफ़र में मैं तन्हा नहीं हूँ यारों
घर के सभी ज़िम्मों को जो साथ लिया मैंने

Pritam sihag

संसार को बेहद ज़ालिम जान लिया मैंने
फिर उससे मिला हाथों को चूम दिया मैंने

जो उसने किताब-ए-ग़म तोहफ़े में मुझे दी थी
इक पन्ना ये याद-ए-रफ़्ता चूम लिया मैंने

Pritam sihag

एक और वादा उसने किया मोहब्बत का
पिछले साल भी ऐसे वादे से वो मुकरी थी

Pritam sihag

तेरे बग़ैर मेरा अफ़्साना चाहता हूँ
या'नी कि ज़िंदगी में वीराना चाहता हूँ

यूँ ही नहीं लगाया सिगरेट को लबों से
मैं उसकी सारी यादें सुलगाना चाहता हूँ

Pritam sihag

यूँ तो लिख लूँगा अपने आप ही मेरी कहानी मैं
हो इन में नाम गर अपनों के भी शामिल तो क्या होता

Pritam sihag

चाहे जितना भी ख़फ़ा होऊँ मैं तुमसे लेकिन
मिट्टी की प्यास पे बादल ये बरस जाता है

Pritam sihag

उसने इक दिन छोड़ने की बात कह दी
यानी मेरे दिल की बातें जानती थी

Pritam sihag

यूँ ही नहीं लगाया सिगरेट को लबों से
मैं उसकी सारी यादें सुलगाना चाहता हूँ

Pritam sihag

ये तुम रोज किस दरिया में बह रहे हो
ये दिल खाली है, तुम कहाँ रह रहे हो

ये मैं हूँ कि ग़म में लिखे जा रहा हूँ
वो कहते हैं अच्छी ग़ज़ल कह रहे हो

Pritam sihag

अरे ख़ुदकुशी करने वाले ज़रा रुक
वतन पर मरो ऐसे क्या मर रहे हो

Pritam sihag

ये कहानी झूठी है ,पर सच्चा मैं किरदार हूँ
यूँ ख़फ़ा मत हो तू ,मैं तेरे बिना बे-कार हूँ

ए मोहब्बत के समुंदर मुझ को ले डूबेगा तू
कश्ती भी उसकी हुई ,ऊपर से बे-पतवार हूँ

Pritam sihag

अंतर है ये रिश्ता रखने और निभाने में
हर कोई नहीं जल सकता दीप जलाने में

Pritam sihag

ये सोचा था ग़रीबी को किताबों से मिटाऊँगा
न था मालूम मैं भूखा किताबें ही खा जाऊँगा

मिरे कंधों पे घर का बोझ आता जा रहा है अब
मैं अब ख़्वाबों को बाहर का ही रास्ता तो दिखाऊंँगा

Pritam sihag

जानते हो तुम सच्चे इश्क़ की रवानी क्या
मरने भर से पूरी हो जाती है कहानी क्या

Pritam sihag