@piyush-shrivastava
Piyush Shrivastava shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Piyush Shrivastava's shayari and don't forget to save your favorite ones.
Followers
1
Content
22
Likes
7
जैसे गहरी सी नदिया की मझधार में
ऐसे उलझा पड़ा हूँ मैं संसार में
जो भी चाहे वो उतनी ही चाभी भरे
जैसे कोई खिलौना हूँ बाज़ार में
नहीं भरते हैं गहरे ज़ख़्म भी मरहम लगाने पर
बहुत तकलीफ़ होती है बिछड़ अपनों से जाने पर
तवज्जोह दी न जीते जी बुज़ुर्गों को कभी जिसने
चढ़ाने चल दिया वो हार उनकी मौत आने पर
छिले हैं पाँव माँ के राह में चलते हुए फिर भी
लगी है भूख वो हर रोज बच्चों की मिटाने पर
शाम जो उनको साथ बैठाया
आसमाँ ने भी नूर बरसाया
साज़िशे सारे तारों ने की जब
अपनी ज़ुल्फ़ों को उसने लहराया
चाँद भी जलने सा लगा फिर जब
उसने खुलके ज़रा सा मुस्काया
ज़बाँ मीठी तो आँखों में समंदर लेके फिरते हैं
यहाँ के लोग शैतानी का मंतर लेके फिरते हैं
फ़रेबी सी ये दुनिया हो रही है ग़ैर तो छोड़ो
यहाँ तो अपने ही हाथों में ख़ंजर लेके फिरते हैं
रब के बनाए ख़ून के रिश्ते हैं और ये
उन रिश्तों में हमेशा से तकरार करती है
दौलत की लत लगी है ज़माने के लोगों को
लत है कि अच्छे खासों को बीमार करती है
छोड़ कर के हमको यूँ तन्हा वो भी पछताई होगी
सोच कर रुस्वाई उसकी आँख भी भर आई होगी
काँपी तो होगी हथेली उसकी भी, तब जाके मेहँदी
ग़ैर की ख़ातिर ही उसने हाथों में रचवाई होगी
ज़िंदगी में अपनी हम कुछ फेर लिख दें
हार में रुस्वाई का कुछ ढ़ेर लिख दें
तुम हमारी कुछ बुराई लिखते जाओ
हाल पर हम अपने कोई शेर लिख दें
इक तन्हा ज़िंदगी है बस क़हर बन रही है
जो ज़ख़्मों की दवा थी अब ज़हर बन रही है
सोचा ख़याल था इक थे दर्द कुछ दिखाने
जो शायरी लिखी है तो बहर बन रही है
कुछ ग़ैरों ने लूटा हमें लूटा हमें कुछ अपनों ने
नींदे रहीं बस रातों की वो लूट ली कुछ सपनों ने
पहले सन्नाटा रहा फिर आँधी आई
लुट गया सब मेरा फिर बरबादी आई
मेरे ख़्वाबों का मकाँ भी हिल गया तब
जब फ़रेबी की हवा तूफ़ानी आई