Piyush Shrivastava

Piyush Shrivastava

@piyush-shrivastava

Piyush Shrivastava shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Piyush Shrivastava's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
बातें दिल में यूँ कुछ मेरे चुभती रहीं
जैसे लगती है इक कील दीवार में
Piyush Shrivastava
जैसे गहरी सी नदिया की मझधार में
ऐसे उलझा पड़ा हूँ मैं संसार में

जो भी चाहे वो उतनी ही चाभी भरे
जैसे कोई खिलौना हूँ बाज़ार में
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Piyush Shrivastava
ये ज़िन्दगी में अब भला क्या हो गया
ख़ुद से मिले मुझको तो अरसा हो गया
Piyush Shrivastava
नहीं भरते हैं गहरे ज़ख़्म भी मरहम लगाने पर
बहुत तकलीफ़ होती है बिछड़ अपनों से जाने पर
Piyush Shrivastava
तवज्जोह दी न जीते जी बुज़ुर्गों को कभी जिसने
चढ़ाने चल दिया वो हार उनकी मौत आने पर

छिले हैं पाँव माँ के राह में चलते हुए फिर भी
लगी है भूख वो हर रोज बच्चों की मिटाने पर
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Piyush Shrivastava
अकेला रह गया है फूल तितली उड़ गई जब से
सुना है बाग़ उजड़ा था कभी तूफ़ान आने पर
Piyush Shrivastava
शाम जो उनको साथ बैठाया
आसमाँ ने भी नूर बरसाया

साज़िशे सारे तारों ने की जब
अपनी ज़ुल्फ़ों को उसने लहराया

चाँद भी जलने सा लगा फिर जब
उसने खुलके ज़रा सा मुस्काया
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Piyush Shrivastava
ज़बाँ मीठी तो आँखों में समंदर लेके फिरते हैं
यहाँ के लोग शैतानी का मंतर लेके फिरते हैं

फ़रेबी सी ये दुनिया हो रही है ग़ैर तो छोड़ो
यहाँ तो अपने ही हाथों में ख़ंजर लेके फिरते हैं
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Piyush Shrivastava
रब के बनाए ख़ून के रिश्ते हैं और ये
उन रिश्तों में हमेशा से तकरार करती है

दौलत की लत लगी है ज़माने के लोगों को
लत है कि अच्छे खासों को बीमार करती है
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Piyush Shrivastava
छोड़ कर के हमको यूँ तन्हा वो भी पछताई होगी
सोच कर रुस्वाई उसकी आँख भी भर आई होगी

काँपी तो होगी हथेली उसकी भी, तब जाके मेहँदी
ग़ैर की ख़ातिर ही उसने हाथों में रचवाई होगी
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Piyush Shrivastava
ज़िंदगी में अपनी हम कुछ फेर लिख दें
हार में रुस्वाई का कुछ ढ़ेर लिख दें

तुम हमारी कुछ बुराई लिखते जाओ
हाल पर हम अपने कोई शेर लिख दें
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Piyush Shrivastava
इक तन्हा ज़िंदगी है बस क़हर बन रही है
जो ज़ख़्मों की दवा थी अब ज़हर बन रही है

सोचा ख़याल था इक थे दर्द कुछ दिखाने
जो शायरी लिखी है तो बहर बन रही है
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Piyush Shrivastava
कुछ ग़ैरों ने लूटा हमें लूटा हमें कुछ अपनों ने
नींदे रहीं बस रातों की वो लूट ली कुछ सपनों ने
Piyush Shrivastava
पहले सन्नाटा रहा फिर आँधी आई
लुट गया सब मेरा फिर बरबादी आई

मेरे ख़्वाबों का मकाँ भी हिल गया तब
जब फ़रेबी की हवा तूफ़ानी आई
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Piyush Shrivastava