इक तन्हा ज़िंदगी है बस क़हर बन रही है जो ज़ख़्मों की दवा थी अब ज़हर बन रही हैसोचा ख़याल था इक थे दर्द कुछ दिखानेजो शा'इरी लिखी है तो बहर बन रही है— Piyush Shrivastava