तवज्जोह दी न जीते जी बुज़ुर्गों को कभी जिस ने
चढ़ाने चल दिया वो हार उन की मौत आने पर
चढ़ाने चल दिया वो हार उन की मौत आने पर
छिले हैं पाँव माँ के राह में चलते हुए फिर भी
लगी है भूख वो हर रोज़ बच्चों की मिटाने पर
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शाम जो उन को साथ बैठाया
आसमाँ ने भी नूर बरसाया
आसमाँ ने भी नूर बरसाया
साज़िशे सारे तारों ने की जब
अपनी ज़ुल्फ़ों को उस ने लहराया
चाँद भी जलने सा लगा फिर जब
उस ने खुलके ज़रा सा मुस्काया
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छोड़ कर के हम को यूँ तन्हा वो भी पछताई होगी
सोच कर रुस्वाई उस की आँख भी भर आई होगी
सोच कर रुस्वाई उस की आँख भी भर आई होगी
काँपी तो होगी हथेली उस की भी, तब जाके मेहँदी
ग़ैर की ख़ातिर ही उस ने हाथों में रचवाई होगी
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एक ख़्वाब
लाल बिंदी माथा चू
में ख़ुशबू महकाए तन
देख उन्हें ख़्वाबों में खिलता हो जैसे मन
चाँद सी प्यारी सूरत झीलों सी गहरी आँखें
शहद से हैं लब उन के मीठी सी उन की बातें
ख़्वाब में मिल जाते हैं हम उन से कुछ ऐसे कि
गुज़रता हैं न दिन न ही गुज़रा करती रातें
पंख फैला उड़ती वो कौन तितली न जाने
फूल हम भी बन जाते जब आती वो महकाने
दूर से देखा करती हैं वो ज़ुल्फ़ों को लहराए
क़त्ल करती हैं मानो कोई उन को समझाए
है परी कोई या है वो कोई जादूगरनी
दिल हमारा मंत्रित कर के वश में करती जाए
ख़्वाब में मिल जाते हैं हम उन से कुछ ऐसे कि
गुज़रता है न दिन न ही गुज़रा करती रातें
Read Fullमें ख़ुशबू महकाए तन
देख उन्हें ख़्वाबों में खिलता हो जैसे मन
चाँद सी प्यारी सूरत झीलों सी गहरी आँखें
शहद से हैं लब उन के मीठी सी उन की बातें
ख़्वाब में मिल जाते हैं हम उन से कुछ ऐसे कि
गुज़रता हैं न दिन न ही गुज़रा करती रातें
पंख फैला उड़ती वो कौन तितली न जाने
फूल हम भी बन जाते जब आती वो महकाने
दूर से देखा करती हैं वो ज़ुल्फ़ों को लहराए
क़त्ल करती हैं मानो कोई उन को समझाए
है परी कोई या है वो कोई जादूगरनी
दिल हमारा मंत्रित कर के वश में करती जाए
ख़्वाब में मिल जाते हैं हम उन से कुछ ऐसे कि
गुज़रता है न दिन न ही गुज़रा करती रातें
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