मेरी दु'आ
मेरी दु'आ है आतिश-ए-इश्क़ में
तेरा घर भी यूँँ ही जला करे
न ज़ख़्म हो न सकूँ मिले
तेरा दिल भी यूँँ ही दग़ा करे
न दर्द हो न दवा मिले
यूँँ मेरी तरह तू जला करे
न हो पास कोई न रक़ीब मिले
यूँँ मेरी तरह तू रोया करे
न ग़म हो न ख़ुशी मिले
इसी आग में तू जला करे
न हो ज़िन्दगी न मौत मिले
यूँँ मेरी तरह तू जिया करे
मेरी दु'आ है आतिश-ए-इश्क़ में
तेरा घर भी यूँँ ही जला करे
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