ऐसा नहीं कि हमको बुलाया नहीं गया
    लेकिन बुला के पास बिठाया नहीं गया

    उसने भी मेरा हाल कभी पूछा ही नहीं
    हमसे भी अपना दर्द जताया नहीं गया

    ख़ुद्दारियाँ भरी हैं हमारे मिज़ाज में
    ख़ुद को गिरा के आगे बढ़ाया नहीं गया
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    Akash Gagan Anjaan
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    उसकी चौखट को चूमे बिन अपना तीर्थ अधूरा है
    औरों की ख़ातिर बस चारों धाम बहुत होते होंगे
    Akash Gagan Anjaan
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    उसे लगता है बस मज़बूत का मतलब है पत्थर
    नदी की चोट से जो ठीक से वाक़िफ़ नहीं है
    Akash Gagan Anjaan
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    हिदायत सख़्त देकर के उसे तुम छोड़ सकते थे
    जिसे चाहो नहीं मिलता मिथक ये तोड़ सकते थे

    किसी की आँख का तारा भला तोड़ा अचानक क्यूँ
    कहानीकार थे तुम तो कहानी मोड़ सकते थे
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    Akash Gagan Anjaan
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    बोलिए मत चाँद तारे तोड़ लाऊँगा प्रिये
    आप तो बस हाथ उसके हाथ में रख दीजिए
    Akash Gagan Anjaan
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    दुनिया ने तो सीधे सीधे पागल बोल दिया पढ़ कर
    मेरे माथे पर जो लिक्खा है पढ़ पाओगी लड़की

    कल भी देखा अब भी देख रहे हैं कल भी देखेंगे
    कितने रोज़ बहानों से बस काम चलाओगी लड़की
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    Akash Gagan Anjaan
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    ज़रा सा भर गए क्या देखिए ना
    घड़े झगड़ा नदी से कर रहे हैं
    Akash Gagan Anjaan
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    बिछड़ के तुझसे सिगरेट पी रहा हूँ
    तेरी सौतन कलेजा खा रही है
    Akash Gagan Anjaan
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    हिज्र के बा'द ये सोचो कि कहाँ जाओगे
    हम तो मर जाएँगे वैसे भी हमारा क्या है
    Akash Gagan Anjaan
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    "कौन सुनता उसकी"
    वो गई नीर भरने को बर्तन में
    भर लाई नयनों में
    वो सूरज की आग को दिन में सहती
    मन की आग को रैनों में

    क्या कहती वो किससे कहती वो
    कौन सुनता उसकी

    कहना चाहा तो बेड़ियाँ आ गई
    कभी पैरों में कभी गहनों में

    कभी चीर से ढका तन कभी ढका मन को
    कभी पिता की पीड़ा खातिर
    ढक लिया जीवन को

    क्या कहती वो किससे कहती वो
    कौन सुनता उसकी
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    Akash Gagan Anjaan
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