Chetan

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    रंग काफ़ी नहीं सुफ़ेदी पर
    तेरी बीनाई है अँधेरे में
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    सारे किरदार रूठ जाएँगे
    गर मुखोटा नहीं लगाऊँ मैं
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    त'अज्जुब तुझसे मिलना था बिछड़ने पर भी हैरत है
    मसीहा वो नहीं था मैं न वो हैवान बन पाया
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    वक़्त ये सालों में बँटे कैसे
    जो न काटा गया कटे कैसे
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    बात कुछ ऐसी कर गया है वो
    मुझमें ख़ामोशी कर गया है वो

    आते हैं ख़ून पीने अब ये ग़म
    आँखें तो ख़ाली कर गया है वो
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    उसने कहा मुझसे कि अब मैं ठीक हूँ
    बिन पूछे यूँ ही बे-सबब मैं ठीक हूँ

    तुमसे गिला कैसे करूँ तुम ख़ुश रहो
    मुझको गिला ख़ुद से है जब मैं ठीक हूँ

    ग़म्माज़ आँखों को सिखाना है मुझे
    है होंठों को कहने का ढब मैं ठीक हूँ

    मुझको बुरा कह कर मिले थे तुमसे जो
    तुमसे बिछड़ कहते वो सब मैं ठीक हूँ

    आना तेरा जाना तेरा मर्ज़ी तेरी
    जब तक चले सब बे-तलब मैं ठीक हूँ

    हाथों में ले कर देखता है दिन मुझे
    जाते हुए कहती है शब मैं ठीक हूँ
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    Chetan
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    उसने वादा किया था आने का
    था मगर वो भी इस ज़माने का

    शुक्र है घर कोई नहीं आया
    जब ठिकाना नहीं था खाने का

    क्यूँ ख़ुशी हो अगर मिलें अब हम
    ज़ख़्म गहरा है दूर जाने का

    क्या तुझे चाहता है अब कोई
    या पता मिल गया ख़ज़ाने का

    अब मुक़ाबिल नहीं हैं हम दोनों
    ये है पल राब्ता निभाने का

    वो सहारा नहीं रहा मेरा
    सो बहाना है डगमगाने का

    तेज़ बारिश में बाम-ओ-दर को क्यूँ
    हक़ नहीं होता थरथराने का

    मुझको रातें जगा रही हैं तो
    दिन को क्यूँ हक़ नहीं सुलाने का

    नाम पर उसके ये कहानी थी
    इंतिहा क्या लिखें फ़साने का

    देता दस्तक तो खुल गया होता
    घर उसी से था आस्ताने का

    इक वजह था वो गुनगुनाने की
    इक बहाना था मुस्कुराने का

    आ गया हूँ उड़ान भरने मैं
    हौसला मुझमें लड़खड़ाने का

    कैसे कोई करे रिहा उसको
    जो सिपाही हो क़ैद ख़ाने का

    हर घड़ी नाम साथ 'गर रहता
    होता कोठा भी घर घराने का

    कौन हसरत तेरी करे चेतन
    शौक़ सब कुछ तुझे गँवाने का
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    जो कहा था वो किया तो क्या खता मुझसे हुई है
    बे-वफ़ा से की वफ़ा फ़िर वो खफ़ा मुझसे हुई है

    जिस नज़र से ज़िंदगी को देख मरता मर चुका है
    उस नज़र से की मोहब्बत क्या जफ़ा मुझसे हुई है
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    काश कोई ख़्वाब ऐसा मौत होने तक न आता
    नींद में जाना जिसे था मेरे सोने तक न आता

    जान मेरी ज़िन्दगी तेरे बिना क्या ख़ाक होती
    प्यार करना भी तेरा वो प्यार खोने तक न आता

    ज़ोर दे कर जब कहा था मान लेते बात मेरी
    भूल जाते तुम मुझे मैं याद रोने तक न आता

    मैं यहाँ तक आ गया हूँ तब मुझे काँधा मिला है
    मैं वहीं मरता कोई पलकें भिगोने तक न आता

    नाम पत्थर का नहीं था तो नदी नाली बनी थी
    आज पूजा कर रहा कल पा डुबोने तक न आता

    मान जाता मैं कि तुमने फ़ासलों से है वफ़ा की
    काश आँखों से निकल कर अश्क कोने तक न आता
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    Chetan
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    ज़माना हमें बे-सहारा न समझे
    ख़ुदा पर भरोसा गवारा न समझे

    उसे कब मिला है जिसे भीड़ घेरे
    उसे रब दिखा जो इजारा न समझे

    किसी को मोहब्बत नहीं है वफ़ा से
    मिरे हिज्र को तू गुज़ारा न समझे

    जिसे मान कर ज़िंदगी जी रहे थे
    वही मौत का था इशारा न समझे

    बिछड़ना ज़रूरी नहीं था मगर तू
    मोहब्बत नहीं है असारा न समझे

    रहा है मुझे याद वो ज़िन्दगी भर
    नफ़ा थी मोहब्बत ख़सारा न समझे
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    Chetan
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