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वो मुझ से दूर जाने को मुसलसल दर बदलता है
कभी घर का पता अपना कभी नंबर बदलता है
कभी घर का पता अपना कभी नंबर बदलता है
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मुझ को तो लगता है तबीअत ठीक नहीं
ख़ैर बताओं हाल तुम्हारा कैसा है
ख़ैर बताओं हाल तुम्हारा कैसा है
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मैं ने लिखी है ख़ुद ख़ुदा पर ये कहानी तो
क़िरदार में कोई कमी हो ही नहीं सकती
क़िरदार में कोई कमी हो ही नहीं सकती
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