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वकीलों से फ़रेबी की क़बीलों से बग़ावत की
निगाहों को पढ़ा जिस ने उसे दिल से मुहब्बत की
निगाहों को पढ़ा जिस ने उसे दिल से मुहब्बत की
ख़ुदा भी बोल बैठा ये ग़ज़ब अपवाद है प्यारे
बताओ कौन है जिस ने मोहब्बत में शिकायत की
परख के देख ले जो माँग अपनी जान रख दूँगा
ज़रा सा मुस्कुरा दे माँ न कर तू बात क़ीमत की
बहाते आँख से मोती लड़ाते दाल से रोटी
ग़रीबों को हमेशा से सज़ा मिलती इबादत की
सड़क पे आबरू को नोचती बाज़ार गीदड़ है
जलाती याद में फिर मोम-बत्ती चार लानत की
जिन्हें भी देखने का शौक़ है उन को दिखाऊँगा
बिछा के लाश सिक्कों की बना शमशान दौलत की
पली है ज़िंदगी सबकी मिली जो भीख बादल से
जहाँ में कौन करता क़द्र बूॅंदों की इनायत की
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बड़ी मेहनत है की मैं ने उसे फिर भूल जाने में
मोहब्बत छोड़ आया मैं फ़रेबी के ज़माने में
मोहब्बत छोड़ आया मैं फ़रेबी के ज़माने में
लिखे हैं शे'र उस की याद में ख़ाली घरौंदे में
रही है मुफ़्लिसी ही साथ मेरे आशियाने में
उसे पहचानने के वास्ते मुड़ के तके नैना
जिसे अब शर्म आती है मुझे अपना बताने में
अकेले तीरगी-ए-शब मिटा देता जहाँ भर के
अगर बाज़ार में माचिस मिले जो चार आने में
कभी तो रौशनी मुझ पे ख़ुदाया ख़ूब डालेगा
ख़ुदा को वक़्त लगता है नया सूरज बनाने में
अकेला शा'इरी करता पिता के बा'द घर में मैं
घुटा करता गँवा देता कला जो मैं कमाने में
भरोसा है मुझे उस पर कभी ईमान डोलेगा
उसी के हाथ कापेंगे मेरा नंबर मिलाने में
बिछड़ के आज तक मैं आशिक़ी कर ही नहीं पाया
समय लगता नहीं महबूब भी उन को पटाने में
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यार सपने देख के मैं डर न जाऊँ
राह तकते मैं अचानक मर न जाऊँ
राह तकते मैं अचानक मर न जाऊँ
है तमन्ना रब बनाऊँ मैं बड़ा घर
घर बने जो फिर कभी मैं घर न जाऊँ
चाल दुर्योधन नहीं शकुनी चले है
डर मुझे है हार फिर चौसर न जाऊँ
हार के ऐसा लगे अब क्या करेंगे
कामयाबी के लगा लंगर न जाऊँ
लोग छेड़ेंगे वहाँ फिर बात उस की
बस यही मैं सोच के दफ़्तर न जाऊँ
आप जो दिल के बगल में दिल रखेंगे
बन कही मैं आप का दिलबर न जाऊँ
इश्क़ के सोहबत रहे तो लग रहा है
बन कहीं मैं आदमी बेहतर न जाऊँ
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सुर्ख़ आँखों और काजल में ठनी है
पाँव के भी पायलों में सनसनी है
पाँव के भी पायलों में सनसनी है
बाल गीले ख़ूब आँचल जँच रही है
माथ बिंदी और पहने करधनी है
ओट में से ताकते मेरे बने है
दाँत से अंगुल दबाते तर्जनी है
चौखटों पर दीप उस के नाम का है
कीट भौंरे कह रहे वो कुंदनी है
रात में जग कर मुझे वो याद करती
रातरानी फूल है वो यामिनी है
यार चक्कर आ रहा बी पी हुआ कम
वो दवा है बात उस की चाशनी है
फिर नशे में मस्त हो के नाचता दिल
जो परी-रुख़ अप्सरा मेरी बनी है
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मानता मैं नहीं हूँ कथन आप का
आप राधा नहीं जो किसन आप का
आप राधा नहीं जो किसन आप का
साफ़ कह दो बहुत है समय आज का
सच बयाँ कर रहा है रहन आप का
नींद बाधित करो अब जगाओ मुझे
अब नहीं देखा जाता सपन आप का
चोट इतने दिए पास रह कर मुझे
इस लिए कर रहा हूँ दहन आप का
वे सभी चाँद तारे नहीं चाहिए
कब मुझे चाहिए था गगन आप का
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वो कहाँ की महानता बोलो
जो तबस्सुम पे हम-रहाँ हो लो
जो तबस्सुम पे हम-रहाँ हो लो
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