सूखने की हद तलक अब आ गए दोनों कुएँ
इस क़दर पानी लगा है रुख़्सती के काम में
इस क़दर पानी लगा है रुख़्सती के काम में
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हमारी ज़िंदगी का फ़लसफ़ा क्या
फ़क़त इक है से था तक का सफ़र है
फ़क़त इक है से था तक का सफ़र है
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साथ में रकीबों की बद्दुआएँ चलती हैं
मैं दिया जलाता हूँ तो हवाएँ चलती हैं
मैं दिया जलाता हूँ तो हवाएँ चलती हैं
मैं तो सीधे रस्ते पे चल के भी अकेला हूँ
मेरी चाहतें अक्सर दाएँ बाएँ चलती हैं
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