Shivam chaubey

Shivam chaubey

@Shivamchaubey

Shivam chaubey shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shivam chaubey's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

1

Content

36

Likes

100

Shayari
Audios
  • Sher
  • Ghazal

Sher

जैसे कि फूल शाख के और चाँद ईद के हम भी तो साथ-साथ हैं पर उस तरह नहीं — Shivam chaubey
ज़हर होता है सबके जिस्मों में नब्ज़ यूँँ ही हरी नहीं होती — Shivam chaubey
जाने किस का ही मुंतज़िर हूँ मैं कौन है जो कभी नहीं आता — Shivam chaubey
हमारी ज़िंदगी का फ़लसफ़ा क्या फ़क़त इक है से था तक का सफ़र है — Shivam chaubey
मुझे मालूम है आगे का क़िस्सा मैं शक़्ल-ए-ख़ामुशी पहचानता हूँ — Shivam chaubey
एक क़िस्सा जो मुकम्मल होते होते रह गया एक लड़की ने किताब आधी पढ़ी और छोड़ दी — Shivam chaubey
हम सेे ज़ंजीर तक नहीं टूटी कैसे रस्म ओ रिवाज़ टूटेंगे — Shivam chaubey
अच्छी खासी यारी है हम दोनों में लेकिन किल्लत ये है कि बस यारी है — Shivam chaubey
शिकायत हम भी करना चाहते हैं मगर ये ज़ब्त हावी हो रहा है — Shivam chaubey
सूखने की हद तलक अब आ गए दोनों कुएँ इस क़दर पानी लगा है रुख़्सती के काम में — Shivam chaubey
आओ कि दूसरी किसी कश्ती का रुख़ करें इस नाव में कुछ भी नहीं आज़ार के सिवा — Shivam chaubey
उस ने हमारे चेहरे पे रक्खा यूँ अपना हाथ जैसे कोई किताब पे इक ऑटोग्राफ़ दे — Shivam chaubey
उस के हिज्र का इक लम्हा जो मैं ने बरसों बरस जिया उस ने तो बस तागा खींचा मैं ने खूब उधेड़ा दुख — Shivam chaubey
सोच रहा हूँ उस को भी एक फ़ोन करूँँ जिस सेे कहने को कोई भी बात नहीं — Shivam chaubey
अपनी कमी के वास्ते दुनिया को दोष दें माना कि वाहियात हैं पर उस तरह नहीं — Shivam chaubey
यार हमारे दिल की जलन ज़ियादा है तुम सिगरेट पे यूँँ ही लेक्चर देती हो — Shivam chaubey
तेरे आने से कुछ नहीं होगा मन तो बहलेगा ग़म बहाली से — Shivam chaubey

Ghazal

बैठे बैठे काट रहा हूँ उन बेलों को आरी से जिन को तुम ने बाँध दिया था दिल की चार-दिवारी से शायद ये ही सोच के बर्टी सुब्ह से गुम-सुम बैठा है शायद चन्दर ने फिर कोई फूल चुराया क्यारी से ना-उम्मीदी रहज़न बनकर जब से साथ हुई मेरे उम्मीदों के सारे बक्से लुट गए बारी बारी से पानी की तस्वीर दिखा कर किस की प्यास बुझी आख़िर फिर भी मेरा दिल अबतक तो बहला है ग़म-ख़्वारी से अपने ही माथे पर अपने हाथों से थपकी देकर बेदारी से लड़ता हूँ या अपनी दिल-आज़ारी से पहली बारिश पहली चाहत पहला बोसा पहला दुख ये चीजें कब ग़ायब होंगी जिस्म की इस अलमारी से — Shivam chaubey