सुर्ख़ आँखों और काजल में ठनी है
पाँव के भी पायलों में सनसनी है
बाल गीले ख़ूब आँचल जँच रही है
माथ बिंदी और पहने करधनी है
ओट में से ताकते मेरे बने है
दाँत से अंगुल दबाते तर्जनी है
चौखटों पर दीप उस के नाम का है
कीट भौंरे कह रहे वो कुंदनी है
रात में जग कर मुझे वो याद करती
रातरानी फूल है वो यामिनी है
यार चक्कर आ रहा बी पी हुआ कम
वो दवा है बात उस की चाशनी है
फिर नशे में मस्त हो के नाचता दिल
जो परी-रुख़ अप्सरा मेरी बनी है
— Aman Vishwakarma 'Avish'















