हाथ से हाथ अब छुड़ा लेंगे
आज से ज़िंदगी विदा लेंगे
पूछता दिल धड़क धड़क के ये
हार कर इश्क़ क्या बचा लेंगे
प्रेम सौदा नहीं हुआ करता
बिक गई मौत आत्मा लेंगे
इश्क़ नाख़ून है समझ लो तुम
काटिए आप हम बढ़ा लेंगे
दाग़ की बात कर रहे हो तुम
आज बाज़ार से नया लेंगे
इस लिए दिल नहीं लगाता मैं
आग से खेल दिल जला लेंगे
— Aman Vishwakarma 'Avish'















