अच्छा मुझे हुआ क्या मुझ को जरा बताओ
शायद हुई मुहब्बत उस की दवा बताओ
पहने सफ़ेद कुर्ता सारे शरीक होंगे
आगे रक़ीब होंगे पीछे घड़ा बताओ
नुक़्ता सजा रखा है मात्रा लगा रखी है
लाती ग़ज़ल कहा से इतनी अदा बताओ
सब दिल-जले यहाँ पर शाइ'र बने हुए हैं
हैं सामने खड़े पर तुम गुमशुदा बताओ
आँखें गड़ी हुई हैं बौनी पड़ी शरीफ़ी
लूटे भरे तिजोरी जो कुछ मिला बताओ
नटखट कहे ज़माना बच्चा बड़ा शयाना
प्रेमी बना हुआ है पी कर पड़ा बताओ
— Aman Vishwakarma 'Avish'















