Abdul Hamid Adam

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@abdul-hamid-adam

Abdul Hamid Adam shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Abdul Hamid Adam's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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Sher

ऐ ग़म-ए-ज़िंदगी न हो नाराज़ मुझ को आदत है मुस्कुराने की — Abdul Hamid Adam
कहते हैं उम्र-ए-रफ़्ता कभी लौटती नहीं जा मय-कदे से मेरी जवानी उठा के ला — Abdul Hamid Adam
फिर आज 'अदम' शाम से ग़मगीं है तबीअत फिर आज सर-ए-शाम मैं कुछ सोच रहा हूँ — Abdul Hamid Adam
हद से बढ़ कर हसीन लगते हो झूटी क़स में ज़रूर खाया करो — Abdul Hamid Adam
बढ़ के तूफ़ान को आग़ोश में ले ले अपनी डूबने वाले तिरे हाथ से साहिल तो गया — Abdul Hamid Adam
दिल अभी पूरी तरह टूटा नहीं दोस्तों की मेहरबानी चाहिए — Abdul Hamid Adam

Ghazal

गो तिरी ज़ुल्फ़ों का ज़िंदानी हूँ मैं भूल मत जाना कि सैलानी हूँ मैं ज़िंदगी की क़ैद कोई क़ैद है सूखते तालाब का पानी हूँ मैं चाँदनी रातों में यारों के बग़ैर चाँदनी रातों की वीरानी हूँ मैं जिस क़दर मौजूद हूँ मफ़क़ूद हूँ जिस क़दर ग़ाएब हूँ ला-फ़ानी हूँ मैं मुझ को तन्हाई में सुनना बैठ कर मुतरिब-ए-लम्हात-ए-वजदानी हूँ मैं जिस क़दर करता हूँ अंदेशा 'अदम' उस क़दर तस्वीर-ए-हैरानी हूँ मैं अक़्ल से क्या काम मुझ नाचीज़ का एक मा'मूली सी नादानी हूँ मैं हूँ अगर तो हूँ भी क्या इस के सिवा क़ीमती विर्से की अर्ज़ानी हूँ मैं दिल की धड़कन बढ़ती जाती है 'अदम' किस हसीं के ज़ेर-ए-निगरानी हूँ मैं — Abdul Hamid Adam
हँस हँस के जाम जाम को छलका के पी गया वो ख़ुद पिला रहे थे मैं लहरा के पी गया तौबा के टूटने का भी कुछ कुछ मलाल था थम थम के सोच सोच के शर्मा के पी गया साग़र-ब-दस्त बैठी रही मेरी आरज़ू साक़ी शफ़क़ से जाम को टकरा के पी गया वो दुश्मनों के तंज़ को ठुकरा के पी गए मैं दोस्तों के ग़ैज़ को भड़का के पी गया सदहा मुतालिबात के बा'द एक जाम-ए-तल्ख़ दुनिया-ए-जब्र-ओ-सब्र को धड़का के पी गया सौ बार लग़्ज़िशों की क़सम खा के छोड़ दी सौ बार छोड़ने की क़सम खा के पी गया पीता कहाँ था सुब्ह-ए-अज़ल मैं भला 'अदम' साक़ी के ए'तिबार पे लहरा के पी गया — Abdul Hamid Adam