चलो अब चाय पीते हैं कहीं पर
    तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
    Prashant Arahat
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    कोई शोहरत के पीछे भागता है
    कोई दौलत के पीछे भागता है

    जिसे ये इश्क़ भी हासिल नहीं है
    वो बस चाहत के पीछे भागता है
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    Prashant Arahat
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    मैं समझा ही नहीं कुछ भी कि ऐसा क्या हुआ है
    किनारा कर लिया तुमने चलो अच्छा हुआ है

    बहुत पहले से ही मैं देखकर ये सोचता था
    न जाने क्या हुआ लहजा ये क्यों बदला हुआ है
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    Prashant Arahat
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    किनारे पर लगाने को मेरी कश्ती वही माँझी
    बदलकर रूप को अपने वही हर बार आएगा
    Prashant Arahat
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    तुम्हारी गालियों का अब असर होता नहीं मुझ पर
    ज़रा ही देर बैठा था मैं सोहबत में फकीरों की।
    Prashant Arahat
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    नाम उसका है बहुत प्यारा मगर ये आरज़ू है
    बस मेरा सरनेम वो पीछे लगाना चाहती है।
    Prashant Arahat
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    भले हो एक-तरफ़ा या कि हो दोनों तरफ़ वाला
    बिना इस इश्क़ के दुनिया में जीने का मज़ा क्या है
    Prashant Arahat
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    संधि की शर्तों पे कायम हो गई है दोस्ती
    अब नए आयाम गढ़ती जा रही है दोस्ती

    कॉल तुमने काट दी ये बोलकर मैं व्यस्त हूँ
    झूठ ये पहचान कर उस पर हँसी है दोस्ती

    देखकर लहजा तुम्हारा सोचता हूँ मैं यही
    दुश्मनी तुमसे भली है या भली है दोस्ती

    ये नज़र-अंदाज़ करने की हदें सब देखकर
    रेतकर अपना गला अब मर रही है दोस्ती

    भावना से जो घिरे हैं वो तो धोखा खाएँगे
    आज कल उनके लिए मीठी छुरी है दोस्ती

    फ़र्क़ इतना है तुम्हारे और मेरे बीच में
    नफ़रतें तुमने चुनी मैंने चुनी है दोस्ती

    शाइरी पढ़कर मेरी 'अरहत' समझते हो मुझे
    बाद में पछताओगे तुमसे नई है दोस्ती
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    Prashant Arahat
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    जहाँ तुम शौक़ में कुत्ते घरों में पाल लेते हो
    वहाँ ही रोड पर बच्चा बहुत भूखा बेचारा है

    तुम्हें तो तैरना भी सीखना होगा यहाँ रहकर
    हमारे यार ये दुनिया नहीं है इक शिकारा है
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    Prashant Arahat
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    जिस्म को चादर बनाया ही नहीं
    रात भर दीपक बुझाया ही नहीं

    फ़र्ज़ उसको जो निभाना चाहिए
    वो कभी उसने निभाया ही नहीं

    हाल दिल का सब कहा है शेर में
    राज़ कुछ उनसे छुपाया ही नहीं

    जो कहा था शेर उनके वास्ते
    वो कभी उनको सुनाया ही नहीं

    मैं बहुत ही चाहता उसको रहा
    पर कभी उसको बताया ही नहीं

    बाँट लेते आपके हम दर्द-ओ-ग़म
    आपने अपना बनाया ही नहीं
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    Prashant Arahat
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